अम्बिकापुर। छत्तीसगढ़ के अम्बिकापुर में ‘सट्टा गैंग-2’ के खिलाफ पुलिस ने अब तक की सबसे बड़ी घेराबंदी शुरू कर दी है। एक साधारण चपरासी के नाम पर दो अलग-अलग बैंक खाते खुलवाकर 1 करोड़ 80 लाख रुपये के संदिग्ध वित्तीय लेनदेन का सनसनीखेज मामला सामने आया है। इस पूरे खेल के तार सीधे तौर पर बड़े क्रिकेट सट्टा सिंडिकेट से जुड़े होने की आशंका है, जिसके बाद पुलिस इस पूरे नेटवर्क की कब्र खोदने और सिंडिकेट का पर्दाफाश करने की तैयारी में जुट गई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए राहुल बंसल (CSP) के नेतृत्व में एक विशेष टीम गठित कर शुक्रवार की देर रात करीब 10:30 बजे मुख्य आरोपी अनुज सिंह को घेराबंदी कर दबोच लिया। बताया जा रहा है कि आरोपी बस के जरिए शहर से फरार होने की फिराक में था।
यह पूरा मामला तब खुला जब गांधीनगर थाना क्षेत्र के हनुमान मंदिर के पास रहने वाले और कृषि विभाग गंगापुर में चपरासी के पद पर पदस्थ वैभव सूर्यवंशी (20 वर्ष) ने थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के मुताबिक, करीब सात महीने पहले वैभव की मुलाकात नावापारा निवासी सुमित सिंह ठाकुर और अनुज सिंह से एक रैली के दौरान हुई थी। नवंबर 2024 में दोनों ने वैभव से संपर्क साधा और दोस्ती का वास्ता देते हुए कहा कि उन्हें अपने घर बनवाने के लिए कुछ रकम बाहर से मंगानी है, जिसके लिए उन्हें एक बैंक खाते की जरूरत है। आरोपियों ने वैभव को झांसा दिया कि काम होने पर वे उसे भी कुछ खर्चा-पानी देंगे।
इसके बाद दोनों आरोपी वैभव को नावापारा में अपने एक परिचित के घर ले गए, जिसे उन्होंने आईडीबीआई (IDBI) बैंक का कर्मचारी बताया। वहां मौजूद शख्स के पास बैंक की थम्ब मशीन (बायोमेट्रिक) थी। आरोपियों ने दबाव बनाकर मशीन पर वैभव के अंगूठे का निशान लिया और कुछ दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करवा लिए। कुछ दिनों बाद आरोपियों ने वैभव को बैंक भेजकर उसकी चेक बुक, पास बुक और एटीएम कार्ड मंगवा लिया और उसे अपने पास रख लिया। इतना ही नहीं, उन्होंने एक चेक पर वैभव के हस्ताक्षर भी करा लिए।
इस महाफर्जीवाड़े का खुलासा तब हुआ जब 21 मई 2025 को आईडीबीआई बैंक के कर्मचारी अचानक वैभव के घर पहुंचे और बताया कि उसके खाते से बहुत बड़ा और संदिग्ध लेनदेन हो रहा है। घबराए वैभव ने जब अपने मामा को पूरी बात बताई, तो उन्होंने बैंक जाकर पड़ताल की। बैंक से मिले रिकॉर्ड ने सबके होश उड़ा दिए। वैभव के नाम पर 16 नवंबर 2024 को एक सेविंग अकाउंट और 19 नवंबर 2024 को एक करंट अकाउंट खोला गया था। महज कुछ महीनों के भीतर सेविंग खाते में लगभग 80 लाख रुपये और करंट खाते में करीब 1 करोड़ रुपये, यानी कुल 1 करोड़ 80 लाख रुपये का भारी-भरकम लेनदेन किया जा चुका था। ठगी का अहसास होते ही पीड़ित वैभव सूर्यवंशी ने 22 मई 2025 को बैंक पहुंचकर दोनों खातों को फ्रीज करने का आवेदन दिया और गांधीनगर थाने में नामजद शिकायत दर्ज कराई।
सूत्रों का कहना है कि गिरफ्तार आरोपी अनुज सिंह अम्बिकापुर के कुख्यात ‘सट्टा गैंग नंबर 2’ का मुख्य चेहरा है। इतनी बड़ी रकम का चपरासी के खाते से हेरफेर होना सीधे तौर पर क्रिकेट सट्टा के काले कारोबार की ओर इशारा करता है। सीएसपी राहुल बंसल के नेतृत्व में पुलिस की टीमें अब इस सिंडिकेट के दूसरे मुख्य आरोपी सुमित सिंह ठाकुर की तलाश में ताबड़तोड़ छापेमारी कर रही हैं। पुलिस का दावा है कि दूसरे आरोपी को भी जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा। फिलहाल, शहर के इस दूसरे बड़े सट्टा गैंग पर पुलिस के इस कड़े एक्शन के बाद सटोरियों में हड़कंप मचा हुआ है और अब हर किसी की नजर इस बात पर टिकी है कि पुलिस का अगला शिकंजा किस सफेदपोश या बड़े सटोरिये पर कसने वाला है।
