अम्बिकापुर। अंतर्राष्ट्रीय अहिंसा दिवस और महात्मा गांधी की जयंती के अवसर पर छत्तीसगढ़ के कारागार सुधार के क्षेत्र में एक नए अध्याय की शुरुआत हुई है। राज्य शासन के ‘सेवा संकल्प अभियान’ के अंतर्गत केंद्रीय जेल अम्बिकापुर में प्रदेश की पहली ‘परिवार खुली जेल’ (फैमिली ओपन करेक्शनल इंस्टीट्यूशन – ओ.सी.आई.) का शुभारंभ शुक्रवार को जेल महानिदेशक (डीजी) हिमांशु गुप्ता द्वारा किया गया। इस ऐतिहासिक पहल के दौरान जेल अधीक्षक अक्षय सिंह राजपूत सहित विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी व कर्मचारी उपस्थित रहे।
मौजूदा अधोसंरचना का सदुपयोग करते हुए शुरू की गई यह अनूठी व्यवस्था कैदियों को मुख्यधारा से जोड़ने का एक मानवीय प्रयास है। इस नवाचार के तहत फिलहाल दो बंदियों को सपरिवार जेल परिसर में रहने की अनुमति दी गई है। इस व्यवस्था के अंतर्गत बंदी अपने परिजनों के साथ सामान्य जीवन जी सकेंगे। वे सुबह विभिन्न आजीविका व रोजगार के कार्यों के लिए जेल परिसर से बाहर जा सकेंगे और शाम को तय समय पर लॉकअप से पहले उन्हें वापस जेल में उपस्थिति दर्ज करानी होगी।
योजना के अनुसार, बंदियों और उनके परिजनों को सभी मूलभूत सुविधाएं जेल प्रबंधन द्वारा मुहैया कराई जाएंगी। शुरुआती व्यवस्था के तौर पर पहले महीने का राशन विभाग द्वारा दिया जाएगा, जिसके बाद बंदी स्वयं रोजगार के जरिए अपने परिवार का भरण-पोषण करेंगे। इसके लिए जेल प्रशासन रोजगार और स्वरोजगार के पर्याप्त अवसर व संसाधन भी उपलब्ध कराएगा। अधिकारियों का कहना है कि प्रारंभिक चरण की सफलता और समीक्षा के बाद भविष्य में इस खुली जेल के आकार और क्षमता का और अधिक विस्तार किया जाएगा।
