अम्बिकापुर। संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय, अम्बिकापुर इस वक्त भीषण प्रशासनिक घमासान के केंद्र में है, जहाँ विश्वविद्यालय के दो शीर्ष स्तंभ कुलपति राजेंद्र लखपाले और कुलसचिव शारदा त्रिपाठी खुले तौर पर आमने-सामने आ चुके हैं। दोनों के बीच चल रहा गतिरोध अब केवल फाइलों तक सीमित न रहकर सीधे शासन के चौखट तक पहुँच गया है।
कुलपति ने कुलसचिव की योग्यता और अनुभव पर सवाल उठाते हुए उन्हें पद से हटाने की मांग की है और ठेकेदारों से मिलीभगत कर कथित भ्रष्टाचार व वित्तीय अनियमितताओं के गंभीर आरोप जड़े हैं। वहीं दूसरी तरफ, कुलसचिव शारदा त्रिपाठी ने पलटवार करते हुए कुलपति पर गैर-कानूनी ढंग से काम करने के लिए दबाव बनाने का आरोप लगाया है; उनका स्पष्ट कहना है कि नियम विरुद्ध निर्देशों को मानने से इनकार करने के चलते ही उनके खिलाफ यह सुनियोजित पत्राचार शुरू किया गया है।
इस वर्चस्व की लड़ाई के बीच भकुरा परिसर में हुए तमाम कार्यों की शुचिता भी कटघरे में आ खड़ी हुई है। मिट्टी खनन और सुरक्षा व्यवस्था से लेकर फर्नीचर व सफाई सामग्री की खरीद तक में मनमानी और व्यापक गड़बड़ियों के आरोप लग रहे हैं। हालांकि इन वित्तीय और प्रशासनिक आरोपों की जमीनी हकीकत तो स्वतंत्र जांच के बाद ही साफ हो सकेगी, लेकिन व्यवस्था की इस खींचतान ने संस्थागत विकास की रफ्तार पूरी तरह रोक दी है।
विश्वविद्यालय के इस शीर्ष प्रशासनिक टकराव का सबसे बड़ा खामियाजा आम छात्रों को भुगतना पड़ रहा है। एक ओर जहाँ विश्वविद्यालय का मुख्य प्रशासनिक भवन वर्षों बाद भी अधूरा पड़ा है, वहीं दूसरी ओर परीक्षा परिणामों में निरंतर हो रही त्रुटियाँ और फीस वृद्धि जैसे मसले छात्रों के आक्रोश को भड़का रहे हैं, जिसको लेकर वे लगातार सड़कों पर उतरने को मजबूर हैं। शीर्ष अफसरों के बीच मची इस खींचतान ने यह साफ कर दिया है कि संस्थान में नीतियों से ज्यादा प्राथमिकताएं आपसी टकराव को मिल रही हैं।
विश्वविद्यालय की गरिमा और हजारों छात्रों के भविष्य को बचाने के लिए अब केवल बयानबाजी नहीं, बल्कि पूरे मामले की उच्चस्तरीय, निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की दरकार है।
