अयोध्या। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) की तलाश अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंच गई है। देश भर से आए 5,585 आवेदनों की सघन जांच-परख के बाद सर्च कमेटी ने तीन शीर्ष योग्य प्रत्याशियों का एक गोपनीय पैनल तैयार कर मंगलवार, भाद्रपद कृष्ण पक्ष चतुर्थी के शुभ अवसर पर न्यास को सौंप दिया। अब इस त्रिकोणीय पैनल में से किसी एक नाम पर अंतिम मुहर लगाने और आधिकारिक घोषणा करने का दायित्व पूरी तरह श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास के पास है।
इस चयन प्रक्रिया को पारदर्शी और त्रुटिहीन बनाने के लिए अत्याधुनिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) तकनीक और पारंपरिक मानवीय मूल्यांकन दोनों का समानांतर सहारा लिया गया। दिल्ली-एनसीआर, पुणे और ओडिशा के संबलपुर में सक्रिय विशेषज्ञ टीमों ने बहु-स्तरीय छंटनी की, जिसके बाद अंतिम 16 दावेदारों को अयोध्या बुलाकर 11 और 12 अगस्त को आमने-सामने का साक्षात्कार लिया गया।
सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति प्रमोद कोहली, लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) वी.के. चतुर्वेदी और परमाणु वैज्ञानिक डॉ. सुरेश हावरे की सदस्यता वाली उच्चस्तरीय सर्च कमेटी ने महज 38 दिनों के भीतर यह पूरी कवायद पूरी की। 6 जुलाई को समिति के गठन के बाद 11 जुलाई को पात्रता मानदंड तय किए गए, 14 जुलाई को समीर पंडा को सचिव बनाया गया और 18 जुलाई को आवेदन बंद कर दिए गए। इसके बाद 3 से 6 अगस्त के बीच ऑनलाइन संवाद का दौर चला, जिसने अंतिम चरण का मार्ग प्रशस्त किया।
रिपोर्ट सौंपे जाने के अहम अवसर पर न्यास के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंददेव गिरि, महासचिव चंपत राय, महंत दिनेंद्र दास, जिलाधिकारी शशांक त्रिपाठी और अन्य वरिष्ठ पदाधिकारी विशेष रूप से उपस्थित रहे।
