जांजगीर-चांपा. जिले के नवागढ़ ब्लॉक के ग्राम कान्हाईबंद में खुल रहे हैं नए कोल डिपो से ग्रामीण, किसानों की मुसीबत दिनों दिन बढ़ती जा रही हैं. लेकिन उनकी समस्या को सुनने वाला कोई नहीं है. जिला प्रशासन को पूरे मामले की जानकारी है लेकिन अंजान बना हुआ है. सत्ताधारी पार्टी हाथ में हाथ धरे बैठे हुई है. वहीं किसान हितैषी होने का दावा करने वाले विधायक का चाल चरित्र उजागर हो गया हैं. एक ओर सार्वजनिक मंचों से किसानों के समर्थन में भाषण दिए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण क्षेत्र में किसानों के हितों के विरुद्ध संचालित कोल डिपो को कथित रूप से संरक्षण दिया जा रहा है. इससे ग्रामीण किसानों में भारी आक्रोश व्याप्त है.
ग्रामीणों के अनुसार, कोल डिपो के संचालन से आसपास के कृषि क्षेत्रों को लगातार नुकसान हो रहा है. कोयले की धूल, प्रदूषण और भारी वाहनों की अनियंत्रित आवाजाही के कारण खेतों की उपज प्रभावित हो रही है. किसानों का कहना है कि इस संबंध में कई बार शिकायतें की गईं, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई.
सूत्रों का आरोप है कि विधायक के राजनीतिक संरक्षण के चलते कोल डिपो संचालक के खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई नहीं हो पा रही है. इससे यह सवाल उठने लगे हैं कि क्या विधायक के लिए किसान हित सिर्फ भाषणों तक सीमित हैं. चुनाव के समय किसानों के हक़, ज़मीन और सम्मान की बात करने वाले विधायक का यह दोहरा रवैया अब ग्रामीणों को गुमराह नहीं कर पा रहा है. किसानों का कहना है कि उन्हें जानबूझकर भ्रमित किया गया और उनके हितों की अनदेखी की गई.
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विधायक का यह चाल-चरित्र धीरे-धीरे उजागर हो रहा है. ग्रामीण इलाकों में असंतोष बढ़ रहा है और किसान अब अपने अधिकारों को लेकर खुलकर सवाल उठाने लगे हैं. फिलहाल, यह मामला क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है और आने वाले समय में किसान आंदोलन या प्रशासनिक हस्तक्षेप की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता.
