जांजगीर चांपा। कन्हाईबंद स्थित कोल डिपो संचालक लगातार विवादों में फंसता जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, डिपो संचालक द्वारा पहले रेलवे लाइन से अवैध रूप से बिजली चोरी कर संचालन किया जा रहा था। मामला सामने आने के बाद रेलवे की ओर से कार्रवाई भी हुई, लेकिन इसके बावजूद कहानी यहीं खत्म नहीं हुई।
चौंकाने वाली बात यह है कि ग्राम पंचायत की लिखित आपत्ति के बावजूद बिजली विभाग ने उक्त कोल डिपो को नया विद्युत कनेक्शन जारी कर दिया। जबकि स्थाई या अस्थाई कनेक्शन के ग्राम पंचायत या नगर पालिका का अनापत्ति प्रमाण पत्र जरूर होता है। जिसको नजर अंदाज करते दबाव पूर्वक बिजली विभाग से कनेक्शन लिया गया है। सूत्रों की माने तो कल कोल डिपो के करीबी कनेक्शन के लिए बिजली ऑफिस गया था लेकिन विभाग ने यह कहकर आपत्ति लगा दी कि ग्राम पंचायत का एनओसी नहीं है। लेकिन उसी वक्त विधायक का फोन अधिकारी के पास आया, इसी संबंध पर दबाव बनाया गया। जिसके बाद उन्हें बिजली का कनेक्शन मिला। जबकि इसके पहले रेलवे से चोरी छुपे बिजली का उपयोग कर रहा था.जिस पर शिकायत के बाद कार्रवाई भी हुई। ग्रामीणों का कहना है कि कोल डिपो न तो नियमों का पालन कर रहा है और न ही स्थानीय लोगों की सुरक्षा और पर्यावरण को लेकर कोई ठोस व्यवस्था की गई है।
ग्रामीणों का आरोप है कि जब पंचायत ने साफ तौर पर आपत्ति दर्ज कराई थी, तब बिजली कनेक्शन देना नियमों की खुलेआम अनदेखी है। सवाल उठ रहा है कि आखिर किसके दबाव में या किन परिस्थितियों में विभाग ने यह फैसला लिया? यह बड़ा सवाल खड़े हो रहा हैं। आखिर खुले आम नियमों की धज्जियां उड़ाते कोल डिपो पर किसका संरक्षण हैं, यह किसी से छिपी नहीं हैं। कल राजस्व विभाग की टीम कोल डिपो के जमीन का सीमांकन करने पहुंची तो मौके पर विधायक भी पहुंचे। जिसको देख कर ग्रामीण किसानों के विधायक पर कोल डिपो संचालक को संरक्षण देने का आरोप लगाया। और विधायक को खूब खरीखोटी सुनाई।
ग्रामीणों लोगों में भारी रोष है। उनका कहना है कि अगर एक तरफ आम आदमी पर छोटी-सी गलती पर जुर्माना और कनेक्शन काट दिया जाता है, तो वहीं दूसरी ओर चोरी के आरोप झेल रहे डिपो को सरकारी संरक्षण क्यों?
अब निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं —
👉 क्या पंचायत की आपत्ति को नजरअंदाज करने की होगी जांच?
👉 क्या रेलवे से बिजली चोरी के मामले में होगी ठोस कार्रवाई?
👉 या फिर मामला फाइलों में ही दबा दिया जाएगा?
सवाल बहुत हैं, जवाब अब भी बाकी।
