जांजगीर-चांपा. जिले में जिला भाजपा के नए कार्यकारिणी को बने अब एक वर्ष बीत गए हैं. जिनके जिलाध्यक्ष पामगढ़ के पूर्व विधायक अंबेश जांगड़े है. युवा है, अनुभवी है. लेकिन अभी भी कार्यकर्ताओं में तालमेल नहीं बना पाए है. जिससे कार्यकर्ताओं में नाराज़गी देखने को मिल रही है. यह नजारा तब देखने को मिला जब जिला मुख्यालय जांजगीर के बीजेपी कार्यालय में प्रदेश महामंत्री नवीन मारकंडे का दौरा कार्यक्रम था. कार्यालय में जी राम जी योजना को लेकर प्रेस कॉन्फ्रेंस लेने वाले थे, लेकिन जब कार्यक्रम में पहुंचे तब वहां गिनती के कार्यकर्ताओं की उपस्थित थी. यहां तक जिला महामंत्री कार्यक्रम में लेट से पहुंची. वही इस कार्यक्रम में जिला एवं प्रदेश प्रतिनिधि सूचना के अभाव में उपस्थित नहीं हो पाए. उन्होंने इसकी शिकायत महामंत्री से भी किए है. जिला भाजपा अध्यक्ष पर निष्क्रियता का आरोप लग रहे हैं.
जिला भाजपा कार्यकारिणी में तालमेल की कमी दिखाई दे रही है. जिसके चलते जिला एवं प्रदेश प्रतिनिधियों को न तो प्रेस वार्ता की सूचना समय पर मिलती है, न ही बैठक की सूचना समय पर मिलती है. ऐसा कार्यकर्ताओं का कहना है. जिसके कारण वे जिला अध्यक्ष से नाराज है. कहा तो यह भी जा रहा है कि जिसकी जिम्मेदारी सूचना देने की होती है. वे सिर्फ अपने अपने गुट के लोगों को सूचना कर देते हैं. प्रदेश प्रतिनिधियों को इसकी सूचना भी नहीं मिलती. सभी बड़े नेता अलग-अलग गुट में बटे नजर आ रहे है. जिला भाजपा में गुटबाजी साफ दिखाई दे रही है. प्रेसवार्ता कार्यक्रम में इसका उदाहरण देखने को भी मिला. प्रदेश महामंत्री ने भी इसका एहसास किया जब उनके कार्यक्रम में जिला महामंत्री खुद ही प्रेस वार्ता में लेट से पहुंची हैं.
इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि आम कार्यकर्ताओं का क्या हाल होगा. इस कार्यक्रम में गिनती के प्रदेश प्रतिनिधि की उपस्थिति रही. उनको सही समय पर सूचना भी नहीं मिल पाया था. जिसके कारण जिला भाजपा कार्यकर्ता अलग-अलग या गुटों में बटे दिखाई दे रहे हैं. जिला अध्यक्ष का कार्यकाल 1 वर्ष बीत जाने के बाद भी अभी भी जिला भाजपा में एकजूटता दिखाई नहीं दे रहा है. सभी अलग-अलग धड़ों में बटे दिखाई दे रहे. हालांकि जिले में यह भी चर्चा है कि जिला अध्यक्ष अपने विवेक का प्रयोग नहीं करते अपने आजू-बाजू चमचाई करने वाले छूट भैया नेताओं के बहकावे में आकर निर्णय लेते हैं. जिसके चलते उनका इमेज खराब हो रहा है. अब समय रहते अगर जिला अध्यक्ष अपने सक्रियता, दमदारी एवं अपने अनुभवों का उपयोग करें तो जिला भाजपा एवं कार्यकर्ताओं में जोश आ जाएगा. और एकजुटता दिखाई देगा. लेकिन अभी तक इस तरह का हालात नहीं बनते दिख रहे है. जिला भाजपा अलग-थलक नजर आ रही है. किसी व्यक्ति विशेष लोगों पर जिला अध्यक्ष का ज्यादा ही विश्वास और भरोसा नजर आ रहा है. लेकिन जिला अध्यक्ष को सभी छोटे-बड़े कार्यकर्ताओं को साथ लेकर चलना होगा. जिसमें बीजेपी को मजबूती मिलेगी और कार्यकर्ताओं में जोश देखने को मिलेगा. अब यह कब होगा यह आने वाले समय पता चल पाएगा.
मीडिया से बनाते हैं दूरी…
जिले के सभी तीन विधानसभा में कांग्रेस के विधायक हैं, बीजेपी का यहां पत्ता साफ है. बीजेपी के एक सांसद भी हैं लेकिन उनका आता पता नहीं रहता है. जिला मुख्यालय में उनका कार्यालय नहीं होने से उनसे भी मुलाकात नहीं होता. मीडिया को किसी भी मामले में बीजेपी नेताओं का प्रतिक्रिया लेने के लिए जिला अध्यक्ष की मौजूदगी पर्याप्त है. लेकिन जिला अध्यक्ष बहुत से मामलों में मीडिया से दूरी बनाकर चलते हैं. विपक्ष के किसी भी मामलों में जिला अध्यक्ष अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त नहीं करते. जिसके चलते लगता है कि जिला अध्यक्ष मामले में बचने की कोशिश करते हैं. मुखर होकर मीडिया से चर्चा करना सही नहीं समझते. इसलिए जिला अध्यक्ष की दूरी मीडिया से भी है.
