बलरामपुर। सरकारी निर्माण कार्यों में लीपापोती और तकनीकी अनियमितताओं के खिलाफ बलरामपुर जिला प्रशासन ने सख्त रुख अख्तियार किया है। जिले में चेकडैम निर्माण की गुणवत्ता में गंभीर खामियां और अधिक मूल्यांकन का मामला उजागर होने के बाद जनपद पंचायत राजपुर के तकनीकी सहायक रोहित कुमार की संविदा सेवा तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी गई है। इसके साथ ही तीन तकनीकी सहायकों से संयुक्त रूप से 9.13 लाख रुपये की वसूली के आदेश जारी किए गए हैं, जबकि संदेह के दायरे में आए सभी 17 चेकडैमों का सरकारी भुगतान आगामी आदेश तक फ्रीज कर दिया गया है।
मामले की शुरुआत 12 मार्च को स्थानीय समाचार पत्रों में घटिया निर्माण को लेकर प्रकाशित खुलासों से हुई थी। इन खबरों को गंभीरता से लेते हुए प्रशासन ने राज्य कार्यालय के निर्देश पर मुख्य तकनीकी परीक्षक (सतर्कता) से विस्तृत जांच कराई। जांच रिपोर्ट में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए कंक्रीट की घटिया गुणवत्ता को छिपाने के लिए सतह पर अलग से प्लास्टर किया गया था, उप-संरचनाओं में इंजीनियरिंग मानकों की अनदेखी की गई थी और कागजों पर कार्यों का वास्तविक लागत से कहीं अधिक मूल्यांकन दर्शाया गया था।
जांच में दोष सिद्ध होने के बाद 30 अक्टूबर को जारी कड़े आदेश के तहत रोहित कुमार को बर्खास्त करने के अलावा तकनीकी सहायक अविनाश भारती और कृपाशंकर गुप्ता पर मनरेगा अधिनियम 2005 की धारा 25 के तहत आर्थिक दंड लगाते हुए अंतिम चेतावनी जारी की गई है। वित्तीय गड़बड़ी की भरपाई के लिए इन तीनों कर्मियों से 9.13 लाख रुपये की वसूली तय की गई है। भुगतान रोके गए 17 कार्यों में ग्रामीण यांत्रिकी सेवा (RES) संभाग बलरामपुर के 12 और जनपद पंचायत राजपुर के 5 चेकडैम शामिल हैं।
प्रशासनिक स्तर पर जवाबदेही तय करते हुए निगरानी में लापरवाही बरतने वाले शीर्ष अधिकारियों पर भी शिकंजा कसा गया है। कार्यपालन अभियंता सच्चिदानंद कांत, अनुविभागीय अधिकारी जानूराम सोनवानी, राजपुर के जनपद सीईओ संजय दुबे और कार्यक्रम अधिकारी मानसाय सिदार को कारण बताओ नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण तलब किया गया है।
कलेक्टर चंदन संजय त्रिपाठी और जिला पंचायत सीईओ डॉ. आशुतोष चतुर्वेदी ने दो टूक शब्दों में संदेश दिया है कि विकास योजनाओं में केवल कागजी ढांचे खड़े करना स्वीकार्य नहीं होगा। प्रशासन का लक्ष्य ऐसी पारदर्शी और टिकाऊ परिसंपत्तियों का निर्माण करना है, जिनका वास्तविक लाभ लंबे समय तक ग्रामीणों को मिले; मानकों से समझौता करने वाले किसी भी स्तर के अधिकारी को बख्शा नहीं जाएगा।
