अम्बिकापुर..(सीतापुर/अनिल उपाध्याय )..नौ दिनों तक चले शक्ति साधना और आस्था के महापर्व शारदीय नवरात्रि का समापन मां दुर्गा की प्रतिमाओं के विसर्जन के साथ हुआ। सीतापुर नगर सहित समूचे अंचल में दिनभर भक्ति, उत्साह और श्रद्धा का अनूठा संगम देखने को मिला। नौ दिनों की अखंड पूजा-अर्चना के बाद श्रद्धालुओं ने नम आंखों और अपार उल्लास के बीच मां जगदंबे को विदाई दी। सुबह से ही पूजा पंडालों में विसर्जन अनुष्ठान शुरू हो गए थे। विसर्जन से पूर्व महिलाओं ने मां दुर्गा को सिंदूर अर्पित कर महाआरती की और पारंपरिक ‘सिंदूर खेला’ का निर्वहन किया। सुहागिनों ने एक-दूसरे को लाल गुलाल लगाकर सुख-समृद्धि की कामना करते हुए विजयादशमी की शुभकामनाएं दीं।
दोपहर में जयस्तंभ चौक, मध्यनगरीय समिति और लाल बहादुर शास्त्री स्टेडियम से मां दुर्गा की भव्य विसर्जन शोभायात्राएं निकाली गईं। सुसज्जित रथों और वाहनों पर सवार माता रानी के अंतिम दर्शन के लिए सड़कों पर आस्था का जनसैलाब उमड़ पड़ा। ढोल-नगाड़ों, ताशों और डीजे की धुन पर युवा, महिलाएं और बुजुर्ग झूमते नजर आए। हवा में उड़ते लाल-पीले अबीर-गुलाल से पूरा विसर्जन मार्ग सतरंगी हो उठा। समूचा नगर ‘जय माता दी’, ‘दुर्गा माता की जय’ और ‘अगले बरस तू जल्दी आ’ के गगनभेदी जयकारों से गूंज उठा। जगह-जगह स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने शोभायात्रा पर पुष्पवर्षा की और स्वागत शिविर लगाकर श्रद्धालुओं की सेवा की।
नगर भ्रमण के उपरांत प्रतिमाओं का कारवां मांड नदी तट पहुंचा, जहां देर शाम तक वैदिक मंत्रोच्चार और महाआरती के साथ मां दुर्गा की प्रतिमाओं को पवित्र जल में विसर्जित किया गया। जैसे ही मां की प्रतिमाएं जल में समाहित हुईं, श्रद्धालुओं की आंखें छलक आईं। सभी ने हाथ जोड़कर अनजाने में हुई भूलों के लिए क्षमा-याचना की और क्षेत्र में सुख, शांति तथा खुशहाली की कामना करते हुए माता रानी को अंतिम विदाई दी।
