नई दिल्ली। महिला पत्रकार के कथित उत्पीड़न मामले में घिरे दिल्ली पुलिस के सहायक पुलिस आयुक्त (एसीपी) विवेक भगत को फिलहाल अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त (एडीसीपी) का कार्यभार नहीं सौंपा जाएगा। दिल्ली सरकार ने सोमवार देर रात आधिकारिक ‘एक्स’ हैंडल पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि विवेक भगत ने स्वेच्छा से अनुरोध किया है कि जब तक उनके खिलाफ चल रही जांच किसी संतोषजनक निष्कर्ष तक नहीं पहुंच जाती, तब तक वह यह नई जिम्मेदारी स्वीकार नहीं करेंगे। इसके मद्देनजर सरकार ने पांच अक्टूबर को जारी अपने पदोन्नति आदेश में संशोधन करने का निर्णय लिया है।
दिल्ली सरकार के आदेश के तहत दिल्ली, अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह पुलिस सेवा (दानिप्स) के कुल 12 अधिकारियों को एडीसीपी का कार्यभार सौंपा गया था। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह कार्यभार सौंपना एक नियमित प्रक्रिया और केवल अस्थायी व्यवस्था थी, जिससे कोई अतिरिक्त वित्तीय लाभ या नियमित एडीसीपी के पूर्ण वैधानिक अधिकार प्राप्त नहीं होते। अब विवेक भगत का नाम हटाकर शेष 11 अधिकारियों, जिनमें डॉ. विकास श्योकंद, ए. वेंकटेश, गुरसेवक सिंह, रेनू लता, विदुषी कौशिक, मनु हिमांशु, सकारिया मिहिर प्रवीणभाई, गरिमा तिवारी, आशीष कुमार, मनीष लाडला और रोहित गुप्ता शामिल हैं, के लिए संशोधित आदेश जारी किया जा रहा है।
यह पूरा विवाद बीते शनिवार को जंतर-मंतर पर मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आयोजित विरोध प्रदर्शन के दौरान उपजा। इस दौरान कानून-व्यवस्था की स्थिति को नियंत्रित करने के दौरान तीन महिला पत्रकारों ने दिल्ली पुलिस के अधिकारियों पर दुर्व्यवहार और यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाए थे। घटना के बाद पत्रकारों ने संसद मार्ग थाने के बाहर प्रदर्शन कर दोषी अधिकारियों पर प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की थी। दिल्ली पुलिस ने शिकायतों का संज्ञान लेते हुए मामले की निष्पक्ष और विस्तृत जांच अपराध शाखा (क्राइम ब्रांच) को सौंप दी है, जो फिलहाल जारी है।
