नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और SIR के विरोध में विपक्षी दलों का आंदोलन लगातार उग्र होता जा रहा है। विरोध प्रदर्शन के तीसरे दिन मुंबई से लेकर देश की राजधानी दिल्ली तक सियासी सरगर्मी चरम पर पहुंच गई है। दादर के ऐतिहासिक शिवाजी पार्क में बिना अनुमति प्रदर्शन करने के आरोप में मुंबई पुलिस ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के 500 अज्ञात कार्यकर्ताओं सहित आयोजकों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, आयोजक अजिंक्य शिंदे और प्रणव आहिरे ने 2 अक्टूबर को कार्यक्रम की अनुमति मांगी थी, जिसे खारिज कर दिया गया था। इसके बावजूद सार्वजनिक सड़क अवरुद्ध कर अवैध रूप से लाउडस्पीकर का उपयोग किया गया, जिसके चलते BNS और महाराष्ट्र पुलिस अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत कार्रवाई कर CCTV फुटेज के आधार पर उपद्रवियों की पहचान की जा रही है।
इस कानूनी कार्रवाई के बीच मुंबई में इंडिया ब्लॉक ने अपनी ताकत झोंकने का फैसला किया है। शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में मेट्रो सिनेमा जंक्शन से बीएमसी मुख्यालय तक विशाल मार्च निकाला जा रहा है, जिसमें महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) प्रमुख राज ठाकरे के अलावा कांग्रेस और एनसीपी (शरदचंद्र पवार) के शीर्ष नेता संयुक्त रूप से शामिल हैं। राजधानी दिल्ली में भी विरोध की लपटें तेज हैं, जहां लेफ्ट समर्थित छात्र संगठन आइसा (AISA) ने इंडिया गेट से जंतर-मंतर तक मार्च का ऐलान किया है। संवेदनशील स्थिति को देखते हुए चुनाव आयोग मुख्यालय और जंतर-मंतर के आसपास दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं, पूरे इलाके में बैरिकेडिंग कर दी गई है और बीएनएस की धारा 163 का दायरा भी बढ़ा दिया गया है।
इससे पहले दिल्ली के जंतर-मंतर पर आधी रात को बड़ा राजनीतिक ड्रामा देखने को मिला, जब यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने सड़कों पर उतरकर जोरदार प्रदर्शन किया। पुलिस ने हिरासत में लेकर कार्यकर्ताओं को बसों में बैठाया, लेकिन साथी कार्यकर्ताओं ने बसों को घेर लिया, वाहनों के आगे लेट गए और कुछ बसों की छतों पर चढ़ गए। घंटों चली जोर-आजमाइश और तीखी झड़प के बाद प्रदर्शनकारी अपने कई साथियों को पुलिस हिरासत से जबरन छुड़ाने में कामयाब रहे।
इस सड़क संग्राम को राजनीतिक मंच से भी तीखी धार दी जा रही है। पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि जब तक ज्ञानेश कुमार अपने पद से इस्तीफा नहीं देते, तब तक इंडिया ब्लॉक का यह आंदोलन पूरे देश में और अधिक आक्रामक रूप लेगा। वहीं, एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने केंद्र सरकार और संघ पर हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि फॉर्म 7 का दुरुपयोग कर मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जा रहे हैं और एसआईआर की आड़ में पिछले दरवाजे से एनआरसी लागू करने की साजिश रची जा रही है।
