बलौदाबाजार। सेमरिया घाट पुल पर लाखों रुपये की लागत से महज दो महीने पहले बनी कंक्रीट सड़क (सीसी रोड) पहली ही मानसूनी बारिश में तिनके की तरह बह गई। इस घटना ने लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के गुणवत्ता संबंधी दावों की हवा निकाल दी है। पूरे ग्रीष्मकाल में निर्माण कार्य को ठंडे बस्ते में डाले रखने वाले जिम्मेदार अमले ने जैसे ही भारी बारिश का दौर शुरू हुआ, आनन-फानन में पुल की ढलाई का काम शुरू करा दिया था।
तकनीकी मानकों की अनदेखी का आलम यह था कि पुल के ऊपर बहते और जमा पानी के बीच ही कंक्रीट बिछाई जाती रही। स्थानीय स्तर पर उस दौरान भी इस लापरवाही को प्रमुखता से रेखांकित कर चेताया गया था, किंतु विभागीय अधिकारियों ने आंखें मूंदे रखीं। नतीजतन, बहते पानी में किया गया यह अनियोजित निर्माण सामान्य जलस्तर का दबाव भी नहीं झेल सका और नव-निर्मित मार्ग पूरी तरह उखड़ गया।
बरसात के ठीक मुहाने पर इस तरह का जोखिम भरा काम शुरू करने के पीछे अब विभागीय मंशा पर सवाल उठने लगे हैं। यह संदेह गहरा रहा है कि क्या घटिया निर्माण सामग्री और तकनीकी खामियों को छिपाने के लिए ही बारिश के मौसम का चयन किया गया, ताकि पूरी बर्बादी का ठीकरा प्राकृतिक आपदा और जलभराव के सिर फोड़ा जा सके। जनता की गाढ़ी कमाई से वसूले गए राजस्व को इस तरह पानी में बहा देना सीधे तौर पर गंभीर प्रशासनिक उदासीनता को दर्शाता है।
क्षेत्रीय स्तर पर यह भी चर्चा का विषय है कि कथित राजनीतिक संरक्षण के चलते विभागीय अधिकारी नियमों को ताक पर रखकर मनमानी कर रहे हैं। बिना किसी जांच और जवाबदेही के खौफ से किए गए इस काम का खामियाजा अब क्षेत्र की जनता भुगत रही है, जिसे जान जोखिम में डालकर इस क्षतिग्रस्त और असुरक्षित हो चुके पुल से आवागमन करना पड़ रहा है।
