जगदलपुर। स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा घोषित दशहरा और दीपावली अवकाश को लेकर प्रदेश के शिक्षकों और अभिभावकों में असंतोष उभरने लगा है। विभाग ने दशहरा के लिए 17 से 21 अक्टूबर तथा दीपावली के लिए 6 से 10 नवंबर तक 5-5 दिनों की छुट्टियां तय की हैं, लेकिन रविवार को अलग करने के बाद प्रभावी अवकाश केवल चार-चार दिन का ही रह जाता है। ऐसे में दूर-दराज और अन्य जिलों के छात्रावासों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों और गृह क्षेत्र से दूर पदस्थ शिक्षकों के लिए इस सीमित अवधि में घर पहुंचना और वापस लौटना किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं है। इसी विसंगति को देखते हुए छत्तीसगढ़ प्रदेश तृतीय वर्ग शासकीय कर्मचारी संघ ने प्रमुख त्योहारों के अवकाश की अवधि बढ़ाने की मांग उठाई है।
संघ के अनुसार प्रदेश भर के छात्रावासों तथा ‘प्रयास’ जैसी विशेष आवासीय संस्थाओं में हजारों छात्र-छात्राएं अपने घरों से सैकड़ों किलोमीटर दूर रहकर पढ़ाई कर रहे हैं। दशहरा और दीपावली जैसे बड़े पारिवारिक पर्वों पर हर बच्चे की इच्छा अपने माता-पिता और परिजनों के साथ समय बिताने की होती है। सुदूर वनांचल और ग्रामीण इलाकों तक सार्वजनिक परिवहन से पहुंचने और लौटने में ही एक-एक दिन का लंबा समय निकल जाता है। यही स्थिति दूरस्थ क्षेत्रों में पदस्थ शिक्षकों की भी है, जिनकी छुट्टियां सिर्फ यात्रा में ही खत्म हो जाएंगी और वे त्योहार की वास्तविक खुशियों से वंचित रह जाएंगे।
इस व्यावहारिक समस्या को लेकर छत्तीसगढ़ प्रदेश तृतीय वर्ग शासकीय कर्मचारी संघ के प्रदेश महामंत्री गजेंद्र श्रीवास्तव, संभागीय अध्यक्ष अतुल शुक्ला और बस्तर जिला अध्यक्ष संजय चौहान ने मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री तथा स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव को ज्ञापन सौंपने का निर्णय लिया है। संघ का कहना है कि विभाग ने 24 से 28 दिसंबर तक शीतकालीन अवकाश भी घोषित किया है, लेकिन सांस्कृतिक और सामाजिक रूप से सबसे बड़े पर्व दशहरा-दीपावली पर व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाते हुए अवकाश तालिका में तत्काल संशोधन किया जाना आवश्यक है।
