– मुख्यमंत्री मंच पर… नेता मंच पर… लेकिन नेताओं के लिए कुर्सी कहां?
अम्बिकापुर.. अग्र महाकुंभ 2026 के 18वें प्रांतीय अधिवेशन और दशम अग्र अलंकरण समारोह में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय पहुंचे तो मंच सजा हुआ था, स्वागत की तैयारियां थीं और मंच पर सम्मानित मेहमानों के लिए कुर्सियां भी मौजूद थीं… लेकिन जैसे ही सत्ताधारी दल के तीन स्थानीय दिग्गज मंच पर पहुंचे, कहानी थोड़ी अलग नजर आई.

महापौर मंजूषा भगत, बीजेपी जिला अध्यक्ष भारत सिंह सिसोदिया और नगर निगम सभापति हरमिंदर सिंह टिन्नी भी मुख्यमंत्री के साथ मंच पर पहुंचे. उम्मीद रही होगी कि मंच पर उनके लिए भी सम्मान के मुताबिक जगह होगी… लेकिन कुर्सियों की कतार में शायद इन तीनों के नाम की कुर्सी लिखना आयोजक भूल गए!

नतीजा यह हुआ कि मंच पर पहुंचने के बाद तीनों नेताओं को अपने लिए बैठने की जगह तलाशनी पड़ी. कोई आरक्षित कुर्सी नहीं… कोई खाली होती कुर्सी नजर नहीं आई… और मंच पर मौजूद लोगों के बीच यह पूरा दृश्य अपने आप में चर्चा का विषय बन गया..
अब सवाल यह है कि जब मंच पर प्रदेश के मुखिया मौजूद हों, तो उनके साथ मंच साझा करने वाले शहर के महापौर, बीजेपी जिलाध्यक्ष और निगम सभापति के लिए एक कुर्सी का इंतजाम भी नहीं हो पाया?

दिलचस्प बात ये रही कि मुख्यमंत्री के सामने होने के कारण कार्यक्रम से उठकर जाना भी आसान नहीं था. लिहाजा कुर्सी मिली या नहीं, लेकिन मंच पर मौजूद रहना जरूरी था.
उधर मुख्यमंत्री ने अग्रवाल समाज को परिश्रमी, परोपकारी और हजारों लोगों को रोजगार देने वाला समाज बताया. अग्रसेन जयंती पर प्रदेश में अवकाश की घोषणा की और समाज की ओर से पाठ्यक्रम में महाराजा अग्रसेन की जीवनी शामिल करने तथा सरकारी अस्पतालों में समाज की सहभागिता जैसे प्रस्तावों पर विचार करने की बात कही.

लेकिन इन घोषणाओं के बीच कार्यक्रम का एक दृश्य ऐसा भी रहा, जिसकी चर्चा शायद घोषणाओं से ज्यादा हो रही है..
अब इसे आयोजकों की व्यवस्थागत चूक कहें या मंच प्रबंधन की भूल… लेकिन सत्ता के मंच पर कुर्सी का यह छोटा-सा संकट, सियासत में बड़ा सवाल जरूर छोड़ गया..
