@संजय यादव
जांजगीर चाम्पा। राजनीति में कभी-कभी एक तस्वीर ही कई सवाल खड़े कर देती है। ठाकुर छेदीलाल बैरिस्टर स्मृति समारोह-2026 के उद्घाटन अवसर पर कचहरी चौक में शुक्रवार को ऐसा ही नजारा देखने को मिला, जब भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व नेता प्रतिपक्ष नारायण चंदेल ने कांग्रेस विधायक व्यास कश्यप का साल और श्रीफल से सम्मान किया। मंच पर हुए इस सम्मान ने राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं को जरूर हवा दे दी।
आमतौर पर सदन से लेकर सार्वजनिक मंचों तक एक-दूसरे के राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी नजर आने वाले चंदेल और व्यास जब एक ही मंच पर सम्मान की इस रस्म में साथ दिखाई दिए तो मौजूद लोगों की नजरें भी कुछ देर के लिए इसी दृश्य पर टिक गईं। कार्यक्रम संचालक द्वारा व्यास कश्यप के सम्मान की घोषणा होते ही मंच पर मौजूद नेताओं के बीच भी यह दृश्य खास आकर्षण का केंद्र बन गया।
सम्मान तो शिष्टाचार था, लेकिन राजनीति में शिष्टाचार भी कभी-कभी सियासी चश्मे से देखा जाने लगता है। यही वजह रही कि कार्यक्रम खत्म होने के बाद चौक से लेकर राजनीतिक गलियारों तक चर्चाओं का दौर शुरू हो गया..क्या यह महज औपचारिक सम्मान था या इसके पीछे कोई राजनीतिक संदेश भी पढ़ा जाना चाहिए?
कुछ लोगों ने तो इसे दोनों नेताओं के बीच राजनीतिक तल्खी कम करने की कवायद से जोड़ना शुरू कर दिया, जबकि कुछ चर्चाओं में इसे भविष्य की संभावित सियासी नजदीकियों के संकेत के तौर पर भी देखा गया। हालांकि, व्यास कश्यप के किसी राजनीतिक पाला बदलने या किसी खेमे में जाने की कोई आधिकारिक पुष्टिअभी हाल बेहाल नहीं है। इसलिए फिलहाल इसे राजनीतिक अटकलों से ज्यादा कुछ कहना जल्दबाजी होगी।
दिलचस्प यह भी रहा कि जिले के राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों को एक मंच पर सहज माहौल में रखने में जिला प्रशासन की भूमिका भी नजर आई। संभव है कि प्रशासन ने कार्यक्रम को राजनीतिक तनातनी से दूर रखते हुए सौहार्दपूर्ण वातावरण बनाए रखने पर जोर दिया हो।
कार्यक्रम में कलेक्टर जन्मेजय महोबे, पुलिस अधीक्षक विजय पांडे, अकलतरा विधायक राघवेंद्र सिंह, कांग्रेस जिला अध्यक्ष सहित अधिकारी-कर्मचारी और जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।
अब सवाल सिर्फ इतना है…साल और श्रीफल का यह सम्मान महज मंचीय शिष्टाचार था या राजनीति की किताब में कोई नया अध्याय लिखने की भूमिका? जवाब फिलहाल भविष्य के गर्भ में है, लेकिन चर्चाओं का बाजार जरूर गर्म हो चुका है।
