भोपाल। राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ के 150वें गौरवशाली वर्ष के उपलक्ष्य में झीलों की नगरी भोपाल मंगलवार की शाम देशभक्ति, नाद और भारतीय शास्त्रीय परंपरा के एक ऐतिहासिक महाकुंभ की साक्षी बनी। विविधा कलायम सांस्कृतिक समिति और विविधा एकेडमी के संयुक्त तत्वावधान में डीबी सिटी मॉल में आयोजित इस भव्य समारोह ने उस वक्त इतिहास रच दिया, जब एक ही मंच पर एक साथ तीन नए विश्व कीर्तिमान स्थापित हुए। इन अद्वितीय उपलब्धियों को ‘गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स’ में आधिकारिक तौर पर दर्ज कर लिया गया है।
इस सांस्कृतिक अनुष्ठान का सबसे पहला और विस्मयकारी कीर्तिमान संगीतकार अभय तिवारी के नाम रहा। उन्होंने रिले फॉर्मेट में एक के बाद एक 43 विभिन्न वाद्य यंत्रों पर ‘वंदे मातरम्’ की धुन छेड़कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस प्रस्तुति की खासियत यह रही कि इसमें शास्त्रीय व पारंपरिक वाद्यों के साथ-साथ रोजमर्रा की घरेलू वस्तुओं से भी अद्भुत संगीत पैदा किया गया। लगभग तीन महीने के कड़े अभ्यास और मानसिक दबाव के बाद मंच पर साकार हुआ यह प्रयोग दर्शकों के लिए अविस्मरणीय अनुभव बन गया।
इसके तुरंत बाद दूसरा कीर्तिमान तब बना, जब विविधा एकेडमी के 200 से अधिक विद्यार्थियों ने एक सुर में राष्ट्रगीत का सामूहिक गायन शुरू किया। करीब पाँच मिनट तक चले इस गायन में ऋषि बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित मूल संस्कृत छंदों को यथावत प्रस्तुत किया गया। सैकड़ों युवा कंठों से निकले इस एकात्म स्वर ने पूरे परिसर को आध्यात्मिक व राष्ट्रीय ऊर्जा से सराबोर कर दिया।
समारोह का चरम और तीसरा विश्व रिकॉर्ड 150 से अधिक छात्राओं द्वारा प्रस्तुत समूह कथक नृत्य रहा। अंतरराष्ट्रीय कथक गुरु अभिलाषा तिवारी के निर्देशन में तैयार इस प्रस्तुति ने आम तौर पर होने वाले सरल नृत्यों से इतर, कथक की शुद्ध शास्त्रीय व्याकरण, कठिन ताल और सधे हुए पदसंचालन के जरिए राष्ट्रभावना को अभिव्यक्ति दी। घुंघरुओं की झंकार और लाइव संगीत के अद्भुत तालमेल ने यह साबित कर दिया कि भारतीय शास्त्रीय नृत्य आधुनिक मंचों पर भी राष्ट्रभक्ति का सबसे सशक्त माध्यम हो सकता है।
गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स के एशिया हेड डॉ. मनीष विश्नोई ने तीनों प्रस्तुतियों के स्तर को बेमिसाल करार देते हुए मंच से ही इन ऐतिहासिक उपलब्धियों की आधिकारिक घोषणा की। आयोजकों ने स्पष्ट किया कि इस वृहद आयोजन का उद्देश्य केवल कीर्तिमान स्थापित करना नहीं, बल्कि आजादी की चेतना जगाने वाले ‘वंदे मातरम्’ के मूल दर्शन से युवा पीढ़ी को जोड़ना था। कार्यक्रम के सफल समापन पर प्रतिभागियों को प्रोविजनल सर्टिफिकेट दिए जाने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, जबकि आगामी 15 दिनों में स्थायी प्रमाणपत्र प्राप्त होने के बाद सभी साधकों और कलाकारों के सम्मान में एक विशेष अभिनंदन समारोह आयोजित किया जाएगा।
