अम्बिकापुर..(सीतापुर/अनिल उपाध्याय)..सरगुजा जिले का सीतापुर क्षेत्र इन दिनों अपराधियों की खुली चारागाह बन चुका है, जबकि कानून-व्यवस्था की रक्षा का दम भरने वाली खाकी पूरी तरह पंगु नजर आ रही है। दिनदहाड़े 1 करोड़ रुपये के सोने-चांदी के जेवरातों की उठाईगिरी को 21 दिन बीत चुके हैं, लेकिन पुलिस के हाथ अब तक सिर्फ खाली लकीरें ही हैं। थाने की नाक के नीचे धरने पर बैठे सर्राफा व्यापारियों के 6 दिन बीत जाने के बावजूद पुलिस के कानों पर जूं तक नहीं रेंगी है। अब पुलिस की इस नाकामी और सुस्त कार्यशैली के खिलाफ नगर के तमाम सामाजिक संगठन लामबंद हो गए हैं और थाना प्रभारी को अल्टीमेटम सौंपते हुए दो टूक चेतावनी दी है कि यदि बुधवार, 19 अगस्त तक आरोपियों को सलाखों के पीछे नहीं भेजा गया, तो गुरुवार को समूचा सीतापुर बंद कर ऐतिहासिक चक्काजाम किया जाएगा, जिसकी सीधी जिम्मेदारी पुलिस प्रशासन की होगी।
सीतापुर में अपराध का ग्राफ जिस तेजी से उछाल मार रहा है, उसने आम नागरिकों और व्यापारियों का जीना मुहाल कर दिया है। विगत दिनों काशी विश्वनाथ ज्वेलर्स के संचालक अरुण सोनी की स्कूटी से दिनदहाड़े 1 करोड़ के गहनों से भरा बैग उड़ा लिया गया था। उस वक्त आईजी, एसपी और एडिशनल एसपी ने मौके पर पहुंचकर 24 से 48 घंटे में खुलासे का भरोसा दिलाया था, लेकिन हकीकत यह है कि बड़े अफसरों के वादे केवल हवा-हवाई साबित हुए। नतीजा यह है कि पीड़ित व्यापारी थाने के बाजू में ही धरने पर बैठने को मजबूर हैं। अब इस जनांदोलन में अधिवक्ता संघ, सर्व आदिवासी समाज, ब्राह्मण समाज, क्षत्रिय समाज, अग्रवाल समाज, साहू समाज, रौनियार समाज, सिख समाज, मुस्लिम समाज, स्वर्णकार समाज और सीतापुर विकास मंच समेत तमाम संगठन कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हो गए हैं।
पुलिस की नाकामी का आलम सिर्फ एक करोड़ की डकैती जैसी उठाईगिरी तक ही सीमित नहीं है। पुराना बस स्टैंड स्थित श्री श्याम किराना दुकान में सेंधमारी, भवराडाँड़ की चोरी और हाल ही में साप्ताहिक बाजार व नया बस स्टैंड पर दो महिलाओं से 5 लाख के मंगलसूत्र व सोने की चेन की दिनदहाड़े स्नेचिंग जैसी संगीन वारदातों में भी पुलिस की तफ्तीश सिफर साबित हुई है। अपराधी खुलेआम वारदात को अंजाम देकर फरार हो रहे हैं और सीतापुर पुलिस केवल फाइलों का वजन बढ़ाने में जुटी है। नगरवासियों का खुला आरोप है कि अपराधियों में कानून का खौफ खत्म हो चुका है और आम जनता में असुरक्षा का खौफ है। ऐसे में शहरवासियों ने साफ मांग की है कि उच्चाधिकारी तत्काल संज्ञान लेकर सीतापुर थाने की पुलिसिंग में आमूलचूल बदलाव करें, वरना जनता का यह आक्रोश थाने की चौखट से निकलकर सड़कों पर फूटेगा।
