रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र के तीसरे दिन शून्यकाल के दौरान रायपुर के नकटी गांव में हुई बुलडोजर कार्रवाई को लेकर सदन में जबरदस्त हंगामा खड़ा हो गया। विपक्ष द्वारा लाए गए स्थगन प्रस्ताव के अस्वीकार होने और उसके बाद पैदा हुई गर्मा-गर्मी के कारण विधानसभा अध्यक्ष को कड़ा कदम उठाना पड़ा। सदन के वेल (गर्भगृह) में आकर नारेबाजी करने के चलते कई कांग्रेसी विधायकों को विधानसभा से निलंबित कर दिया गया है।
इस संवेदनशील मुद्दे को उठाते हुए कांग्रेस ने आरोप लगाया कि गरीब परिवारों के मकानों पर बुलडोजर चलाना सीधे तौर पर मानवाधिकारों का उल्लंघन है। विपक्ष ने देश में बढ़ रहे ‘बुलडोजर कल्चर’ पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि यह संस्कृति अब भाजपा शासित राज्यों में तेजी से पांव पसार रही है। उन्होंने सरकार पर तंज कसते हुए यहाँ तक कह दिया कि शासन ने इस कार्रवाई में अपनी ही पार्टी के सांसद तक के मान-सम्मान का ध्यान नहीं रखा। विपक्ष ने इस पूरे घटनाक्रम पर सदन में तत्काल चर्चा कराने और सरकार से इस पर जवाब देने की मांग को लेकर भारी नारेबाजी की, जिससे सदन की कार्यवाही बुरी तरह प्रभावित हुई।
दूसरी ओर, सरकार की तरफ से पक्ष रखते हुए राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा ने इस कार्रवाई को पूरी तरह संवैधानिक और न्यायसंगत ठहराया। उन्होंने सदन को स्पष्ट किया कि यह बेदखली अचानक नहीं की गई, बल्कि एक शिकायत के आधार पर बकायदा नोटिस जारी किया गया था। राजस्व मंत्री ने जोर देकर कहा कि अतिक्रमण हटाने की यह पूरी प्रक्रिया न्यायालयीन और कानूनी नियमों का पूर्ण पालन करने के बाद ही अमल में लाई गई है। हालांकि, मंत्री के इस जवाब से असंतुष्ट कांग्रेसी विधायकों ने जब विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह द्वारा स्थगन प्रस्ताव अस्वीकार किए जाने के बाद गर्भगृह में जाकर हंगामा शुरू कर दिया, तो नियमों के तहत उन्हें सदन की सदस्यता से निलंबित कर दिया गया।
