बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर रेल मंडल अंतर्गत करगी रोड स्टेशन पर हुए दर्दनाक मालगाड़ी हादसे में रेलवे सुरक्षा बल (RPF) को बड़ी कामयाबी मिली है। रेलवे ने त्वरित कार्रवाई करते हुए इस साजिश और लापरवाही के मामले में 10 आरोपियों को धर-दबोचा है। 13 जुलाई की रात से लेकर 14 जुलाई की सुबह तक चले एक सघन अभियान के दौरान इन सभी को हिरासत में लिया गया। आरपीएफ ने यह सफलता रेलवे स्टेशनों के सीसीटीवी फुटेज खंगालने, संदिग्धों की मोबाइल लोकेशन ट्रैक करने और अन्य पुख्ता तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर हासिल की है। हालांकि, हादसे का मुख्य आरोपी और निजी ठेकेदार पवन नायक अभी भी फरार है, जिसकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस लगातार छापेमारी कर रही है।
यह पूरा मामला बीते 13 जुलाई 2026 की दोपहर करीब 2:20 बजे का है, जब करगी रोड रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर-2 पर उस वक्त हड़कंप मच गया जब एक मालगाड़ी के तीन डिब्बे अचानक पटरी से उतर गए। गनीमत यह रही कि इस बड़े हादसे में कोई जनहानि नहीं हुई और एक बड़ा टर्नओवर टल गया। घटना की सूचना मिलते ही जब रेलवे के आला अधिकारी और राहत दल मौके पर पहुंचे, तो जांच के दौरान वैगनों के नीचे एक जेसीबी मशीन का भारी-भरकम बकेट फंसा हुआ मिला। इस सुराग ने रेलवे प्रशासन के कान खड़े कर दिए और मामले की परतें खुलती चली गईं।
रेलवे की शुरुआती जांच और पूछताछ में जो सच सामने आया, वह बेहद चौंकाने वाला था। दरअसल, प्लेटफॉर्म नंबर-2 पर जेसीबी के बकेट को उतारने के बाद 5-6 मजदूर उसे खींचकर प्लेटफॉर्म नंबर-1 की तरफ ले जा रहे थे। इसी बीच उसी ट्रैक पर एक तेज रफ्तार मालगाड़ी आती दिखाई दी। मालगाड़ी को अपनी ओर आता देख मजदूर घबरा गए और उस भारी-भरकम लोहे के बकेट को बीच ट्रैक पर ही छोड़कर जान बचाकर भाग खड़े हुए। रफ्तार तेज होने के कारण मालगाड़ी बकेट से टकरा गई, जिसके चलते उसके तीन वैगन बेपटरी हो गए।
इस गंभीर लापरवाही और रेल संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के आरोप में आरपीएफ ने कुल 10 लोगों को गिरफ्तार किया है। पकड़े गए आरोपियों में कमलेश टेकाम उर्फ मुन्ना (25 वर्ष), नरहर सिंह उर्फ पिंटू (35 वर्ष), देवा सिंह (38 वर्ष), बुद्धू सिंह (49 वर्ष), छत्रपति मरावी (32 वर्ष), लोकेश मांडवी (19 वर्ष) और अनुराग मरावी (31 वर्ष) शामिल हैं। इनके साथ ही हादसे की कड़ियों को जोड़ने वाले अभिषेक यादव (21 वर्ष), जेसीबी बकेट मंगवाने वाले मोहम्मद शमीर (24 वर्ष) और कोच अटेंडेंट अमित यादव (23 वर्ष) को भी सलाखों के पीछे भेज दिया गया है। फिलहाल रेलवे प्रशासन फरार ठेकेदार की तलाश के साथ-साथ मामले की आगे की कानूनी कार्रवाई में जुटा है।
