अम्बिकापुर। छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले से एक बार फिर शर्मनाक और कानून व्यवस्था को ठेंगा दिखाने वाली बेहद सनसनीखेज वारदात सामने आई है। अम्बिकापुर के गांधीनगर थाना क्षेत्र स्थित बाल संप्रेक्षण गृह से आज मंगलवार को 13 अपचारी बालक पुराने दरवाजे को उखाड़कर और सुरक्षा व्यवस्था की धज्जियां उड़ाते हुए बड़े आराम से फरार हो गए। चोरी, बलात्कार और हत्या जैसे जघन्य अपराधों में संलिप्त इन बालकों का इस तरह भाग जाना सीधे तौर पर जिले के प्रशासनिक अमले और गृह प्रबंधन के मुंह पर एक करारा तमाचा है।
सबसे ज्यादा थू-थू करने वाली बात तो यह है कि ठीक एक दिन पहले सोमवार को बिलासपुर के बाल संप्रेक्षण गृह में चार बालकों ने सुरक्षा गार्ड की हाथ-पैर बांधकर और गला दबाकर बेरहमी से हत्या कर दी थी। सूबे के बाल संरक्षण आयोग ने उस पर संज्ञान लेकर जवाब तलब किया ही था कि अगले ही दिन अम्बिकापुर प्रबंधन ने अपनी निकम्मी कार्यशैली का एक और खूनी और खौफनाक अध्याय लिख दिया। यह घटना चीख-चीख कर कह रही है कि छत्तीसगढ़ में बाल संप्रेक्षण गृहों की सुरक्षा पूरी तरह से भगवान भरोसे है और जिम्मेदार कुंभकर्णी नींद में सो रहे हैं।
यह कोई पहली घटना नहीं है, बल्कि इस गृह के नाकारा प्रबंधन की लापरवाही का एक लंबा इतिहास रहा है। इसी साल फरवरी में भी यहां से 13 बालक फरार हुए थे, और अभी महीना दिन भी नहीं बीता था कि बीती 23 जून को फिर 13 बालक खिड़की तोड़कर भाग निकले। उस वक्त भी अधिकारियों ने सुरक्षा को लेकर बड़े-बड़े और खोखले दावे किए थे, जो आज फिर ‘टाय-टाय फुस्स’ साबित हो गए। हद तो यह है कि 23 जून को भागे बालकों में से दो का आज तक कोई सुराग नहीं मिल पाया है और पुलिस हाथ पर हाथ धरे बैठी है। लगातार तीन बार एक ही ढर्रे पर हुई इन बड़ी घटनाओं ने साफ कर दिया है कि प्रबंधन और सुरक्षा एजेंसियां सिर्फ कागजी घोड़े दौड़ाने और अपनी जेबें भरने में व्यस्त हैं।
इस घोर लापरवाही के पीछे सिर्फ लचर सुरक्षा ही नहीं, बल्कि प्रबंधन का अमानवीय और क्रूर रवैया भी एक बड़ी वजह माना जा रहा है। अंदरखाने से अक्सर खबरें आती हैं कि इन अपचारी बालकों के साथ प्रबंधन का व्यवहार बेहद घटिया और प्रताड़ित करने वाला होता है, जिसके चलते यह गृह अपराधियों के लिए एक प्रेशर कुकर बन चुका है। फिलहाल, गांधीनगर पुलिस और प्रशासनिक अमला हमेशा की तरह घटना के बाद लकीर पीटते हुए बालकों की तलाश में खाक छान रहा है। लेकिन सवाल यह उठता है कि जब संगीन जुर्म के आरोपी खुलेआम घूम रहे हैं, तो आम जनता की सुरक्षा की गारंटी कौन लेगा?
इस पूरे मामले में संवेदनहीन अधिकारियों और लापरवाह प्रबंधन को तत्काल बर्खास्त कर उन पर कड़ी कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए, क्योंकि इनका यह रवैया पूरे समाज को खतरे में धकेल रहा है।
