भोपाल। मध्य प्रदेश की सियासत में दल-बदल और आंतरिक कलह का दौर थमता नजर नहीं आ रहा है। इसी कड़ी में कांग्रेस को एक और बड़ा झटका देते हुए पार्टी के पूर्व प्रदेश महासचिव और वरिष्ठ नेता राकेश सिंह यादव ने औपचारिक रूप से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का दामन थाम लिया है। गुरुवार शाम भोपाल स्थित भाजपा प्रदेश कार्यालय में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की उपस्थिति में पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। इस मौके पर राकेश सिंह यादव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कुशल नेतृत्व और संगठन की रीति-नीति के प्रति अपनी आस्था व्यक्त करते हुए इसे अपने राजनीतिक जीवन का एक नया अध्याय बताया।
यह कदम अप्रत्याशित नहीं था, क्योंकि राकेश सिंह यादव पिछले कुछ समय से अपनी ही पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के खिलाफ मुखर नजर आ रहे थे। विशेष रूप से प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी और संगठन प्रभारी हरीश चौधरी की कार्यशैली पर गंभीर आरोप लगाने के बाद वे लगातार राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बने हुए थे। कांग्रेस से इस्तीफा देने की घोषणा करते हुए यादव ने सीधे तौर पर दावा किया था कि वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी में संगठन को कुशलतापूर्वक चलाने की योग्यता की कमी है। उन्होंने संगठन के भीतर तानाशाही का माहौल होने का आरोप लगाते हुए कहा था कि पार्टी में मनमाने फैसले लिए जा रहे हैं और हर उस आवाज को दबाया जा रहा है जो नेतृत्व से असहमति जताती है।
राकेश यादव का कांग्रेस नेतृत्व से मोहभंग होने की एक बड़ी वजह वीर भूमि न्यास मामला भी रही। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी नेतृत्व ने बिना किसी ठोस दस्तावेज और पर्याप्त सबूतों के इस मामले में भ्रष्टाचार के आरोप मढ़ दिए। जब उन्होंने एक जिम्मेदार पदाधिकारी के तौर पर इन आरोपों के समर्थन में प्रमाण मांगे, तो संगठन ने जवाब देने के बजाय उन्हें कारण बताओ नोटिस थमा दिया। यादव का तर्क था कि लोकतंत्र में सवाल पूछना हर कार्यकर्ता का संवैधानिक और नैतिक अधिकार है, लेकिन कांग्रेस का वर्तमान नेतृत्व इस लोकतांत्रिक अधिकार को कुचलने का प्रयास कर रहा है।
अपनी नाराजगी को आगे बढ़ाते हुए यादव ने राष्ट्रीय स्तर पर राहुल गांधी की कार्यशैली को भी कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस में जमीनी कार्यकर्ताओं की उपेक्षा कर गलत और चाटुकार लोगों को बढ़ावा दिया जा रहा है। संगठन सृजन अभियान से लेकर तमाम संगठनात्मक नियुक्तियों में पारदर्शिता का पूरी तरह अभाव है। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में दावा किया कि गलत नीतियों के कारण मध्य प्रदेश में कांग्रेस दिन-प्रतिदिन कमजोर होती जा रही है। यदि समय रहते संगठनात्मक ढांचे में बुनियादी सुधार नहीं किए गए, तो आगामी नगरीय निकाय चुनावों में पार्टी को इसके बेहद गंभीर और आत्मघाती परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।
