बलरामपुर..(कृष्णमोहन कुमार)..जिले में इन दिनों जल संरक्षण की दिशा में कार्य किया जा रहा है..और स्थानीय प्रशासन ने जल संचय के लिये किसानों के खेतो मे सोखता गड्ढे खोदने का लक्ष्य निर्धारित किया है..लेकिन इसी बीच एक सरपंच के द्वारा वॉट्सएप ग्रुप में की गई पोस्ट ने स्थानीय प्रशासन के प्रयासों पर पलीता लगा दिया है..वही अधिकारी भी सरपंच की इस करतूत को गलत तो बता रहे है..लेकिन दबी जुबान से वे यह भी स्वीकार कर रहे है..की निर्धारित लक्ष्य की प्राप्ति के लिये कुछ तो करना होगा!.
दरअसल कलेक्टर चन्दन संजय त्रिपाठी की पहल पर जल संरक्षण के लिये ग्रामीणों को जागरूक किया जा रहा है..खेतो के ढलान वाले क्षेत्रों में बारिश का पानी जमा हो सके..इसके लिये 5 ×5 का सोखता गड्ढा श्रमदान के तहत किया जा रहा है..ताकि बारिश का पानी गड्ढों में भरे और वाटर लेवल बना रहे ..स्थानीय स्तर पर ग्राम पंचायतों को 100-100 सोखता गड्ढा श्रमदान के तहत करने का निर्देश भी है..इसके साथ ही कलेक्टर की अपील भी है..की लोग इस जल संरक्षण अभियान में बढ़चढ़ कर हिस्सा ले..
लेकिन बलरामपुर जनपद पंचायत के खटवा बरदर में कहानी कुछ उल्टा है.. यहां निर्धारित लक्ष्य की पूर्ति के लिये सरपंच ने गांव के एक वॉट्सएप ग्रुप पर ऐसा फरमान लिख दिया है..जो चर्चा का विषय बन गया है..सरपंच ने लिखा है की सोखता गड्ढा नहीं करने पर पीडीएस दुकान से प्रदाय की जाने वाली राशन सामग्री नहीं दी जाएगी..
हालांकि सरकारी राशन दुकान से एपीएल और बीपीएल श्रेणी के परिवारों को दी जानी वाली खाद्यान्न सामग्री को हितग्राहियों को प्रदाय किये जाने से रोकने का ऐसा कोई प्रावधान नहीं है!
इधर जनपद पंचायत बलरामपुर के मुख्य कार्यपालन अधिकारी का कहना है..की जल संरक्षण के लिये लक्ष्य निर्धारित की गई है..श्रमदान भी किय जा रहा है..और सरपंच ने जो पोस्ट किया है..वह गलत भी है..लेकिन अधिकारी खुद भी स्वीकार कर रहे है..की निर्धारित लक्ष्य की पूर्ति की कैसे होगी?.मलतब साफ है..ग्रामीणों को जागरूक करने के बजाय सीधे डराया जा रहा है..और लक्ष्य की प्राप्ति कर वाह वाही बटोर ली जाये!.
बहरहाल ग्रामीणों को जल संरक्षण के प्रति अलग-अलग माध्यमों से जागरूक करने की बजाए उन्हें सीधे तौर पर डराया जाना उचित नहीं है..और ऐसे मामलों को संज्ञान में लेकर प्रशासन को कार्यवाही करनी होगी..नहीं तो अर्थ का अनर्थ होने में ज़रा से भी देर नहीं लगेगी!
