– प्रताड़ना के आरोपी रायगढ़ के शासकीय प्राचार्य के तबादले का भी फरमान
रायगढ़। छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की सख्त कार्यप्रणाली और त्वरित न्याय की गूंज सोमवार को रायगढ़ जिला मुख्यालय के सृजन सभाकक्ष में साफ तौर पर देखी गई, जहां आयोग की अध्यक्ष डॉ. किरणमयी नायक एवं संभाग प्रभारी सदस्य सरला कोसरिया की संयुक्त पीठ ने ऐतिहासिक 409वीं जनसुनवाई में कुल 46 गंभीर मामलों का निपटारा किया। इस वृहद न्यायिक अभियान में सार्वजनिक क्षेत्र के बड़े उपक्रम ‘गेल इंडिया’ द्वारा एक ग्रामीण महिला के अधिकारों के हनन का बेहद संवेदनशील मामला सामने आया, जिस पर आयोग ने कड़ा रुख अख्तियार करते हुए कंपनी को तत्काल हर्जाना भरने और संबंधित शीर्ष अधिकारी को व्यक्तिगत रूप से रायपुर मुख्यालय में तलब करने का कड़ा निर्देश जारी कर दिया है।
पीड़ित महिला द्वारा प्रस्तुत शिकायत के अनुसार, गेल इंडिया ने अपनी मुख्य गैस पाइपलाइन बिछाने के दौरान उसकी निजी भूमि के मध्य से खुदाई की थी, जिसके कारण वहां पूर्व से स्थापित करीब 400 फीट गहरा स्थायी बोरवेल पूरी तरह क्षतिग्रस्त और अनुपयोगी हो गया। इस निजी पेयजल व सिंचाई स्रोत के निर्माण पर महिला ने अपनी गाढ़ी कमाई के लगभग ढाई लाख रुपये खर्च किए थे, परंतु सार्वजनिक उपक्रम के जिम्मेदार अधिकारियों ने न तो उसे इसका कोई वैकल्पिक समाधान दिया और न ही क्षतिपूर्ति की राशि प्रदान की। इस पूरी सुनवाई प्रक्रिया के दौरान कंपनी के मुख्य जिम्मेदार अधिकारी लगातार अनुपस्थित रहे और अपनी जगह महज एक कनिष्ठ साइट इंजीनियर को भेजकर औपचारिकता पूरी करने की कोशिश की, जिसे आयोग ने अपनी गरिमा और पीड़िता के न्याय के प्रति गंभीर लापरवाही माना।
मामले की गंभीरता को रेखांकित करते हुए छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष ने गेल इंडिया के महाप्रबंधक सुरेश बाबू को आगामी 9 जुलाई 2026 को राजधानी रायपुर स्थित राज्य मुख्यालय में व्यक्तिगत रूप से हाजिर होने का समन जारी किया है। इसके साथ ही कंपनी को स्पष्ट आदेश दिया गया है कि वह नियत तिथि तक या तो आवेदिका को नया बोरवेल खनन करके सौंपे अथवा क्षतिपूर्ति के रूप में 2.50 लाख रुपये का एकमुश्त नकद भुगतान सुनिश्चित करे। आयोग ने बेहद कड़े शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर इस आदेश का अक्षरशः पालन नहीं किया गया, तो पीड़िता स्थानीय पुलिस थाने में कंपनी और उसके दोषी अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज कराने के साथ-साथ दीवानी न्यायालय की शरण में जाने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र होगी, जिसकी समस्त जवाबदेही संयुक्त रूप से प्रबंधन की होगी।
न्याय के इसी सिलसिले को आगे बढ़ाते हुए आयोग ने पुसौर विकासखंड के अंतर्गत पड़ीगांव हाई स्कूल की एक पीड़ित शिक्षिका की मानसिक प्रताड़ना की गुहार पर भी त्वरित और ऐतिहासिक फैसला सुनाया। शिक्षिका ने अपने ही विद्यालय के प्राचार्य पर लंबे समय से मानसिक रूप से प्रताड़ित करने, दुर्भावनापूर्ण तरीके से वेतन में कटौती करने और वैधानिक रूप से तलाक होने के बाद सेवा पुस्तिका में उपनाम परिवर्तन की शासकीय प्रक्रिया में जानबूझकर अड़ंगे लगाने का गंभीर आरोप लगाया था। आयोग ने प्रथम दृष्टया इन सभी आरोपों को सत्य और प्रशासनिक मर्यादा के विपरीत पाते हुए जिला शिक्षा अधिकारी रायगढ़ को तत्काल निर्देश दिया कि इस विवादित प्राचार्य का आगामी 15 दिनों के भीतर पुसौर से बाहर किसी अन्य दूरस्थ विकासखंड में प्रशासनिक स्थानांतरण सुनिश्चित किया जाए, ताकि शिक्षिका भयमुक्त माहौल में अध्यापन कार्य कर सके।
जनसुनवाई के दौरान ग्रामीण व्यवस्था को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से घरघोड़ा विकासखंड के मेंड्रा (वार्ड क्रमांक-7) में कार्यरत मितानिन के कार्यों से असंतुष्ट ग्रामीणों की सामूहिक शिकायत पर भी तात्कालिक एक्शन लिया गया। आयोग ने ग्राम सरपंच को सीधे आदेश की प्रति सौंपते हुए अकर्मण्य मितानिन को सेवामुक्त कर नियमानुसार पारदर्शी तरीके से नई मितानिन की भर्ती प्रक्रिया अविलंब शुरू करने का मार्ग प्रशस्त किया। इसके अलावा, एक अन्य अत्यंत भावुक कर देने वाले मामले में, जहां एक बेसहारा महिला ने अपने तीन मासूम बच्चों के साथ रहने का आशियाना उजाड़े जाने का दर्द बयां किया, वहां आयोग ने तुरंत जिला कार्यक्रम अधिकारी (डीपीओ) को रायगढ़ कलेक्टर के साथ विशेष समन्वय स्थापित कर प्राथमिकता के आधार पर पीड़िता को सरकारी योजना के तहत आवास स्वीकृत कराने की आधिकारिक अनुशंसा की।
सोमवार देर शाम तक चली इस मैराथन जनसुनवाई में आयोग ने उन मामलों में दखल देने से साफ इनकार कर दिया जो पहले से ही सक्षम न्यायालयों के अधीन हैं, जिसमें भूमि रजिस्ट्री विवाद से जुड़ा एक प्रकरण परिवार न्यायालय में लंबित होने और दोनों पक्षों में पूर्व समझौता हो जाने के कारण नस्तीबद्ध कर दिया गया। इसी प्रकार, पुलिस थाने में कथित रूप से बेवजह बैठाए रखने और वैवाहिक कलह से जुड़े कुल चार अन्य मामलों में उभय पक्षों के मध्य आपसी सहमति, घरेलू सामान व विवादित राशि की सकुशल वापसी सुनिश्चित कराने के बाद आयोग ने सभी पक्षों की रजामंदी से मामलों का सुखद निराकरण किया। पीठ ने अंत में यह संदेश स्पष्ट किया कि छत्तीसगढ़ की धरा पर महिलाओं के मान-सम्मान और उनके विधिक अधिकारों से खिलवाड़ करने वाले चाहे शासकीय अधिकारी हों, निजी रसूखदार हों या बड़ी कॉरपोरेट कंपनियां, आयोग की विधिक सख्ती से कोई बच नहीं पाएगा।
