मुंबई। महाराष्ट्र में कुदरत के रौद्र रूप और मूसलाधार बारिश ने पटरियों की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया है। मुंबई-पुणे रेल खंड पर स्थित ठाकुरवाड़ी स्टेशन के पास सोमवार तड़के अचानक हुए एक भारी भूस्खलन (लैंडस्लाइड) के कारण रेलवे सेवाएं पूरी तरह ठप हो गईं। मलबे की चपेट में आने से रेलवे ट्रैक को भारी नुकसान पहुंचा है, जिसके चलते सुरक्षा के लिहाज से मध्य रेलवे को 14 महत्वपूर्ण एक्सप्रेस ट्रेनों को आनन-फानन में रद्द करना पड़ा है। इस हादसे ने मुंबई-पुणे और मुंबई-नासिक रेल मार्गों को पूरी तरह प्रभावित किया है, जिससे हजारों यात्रियों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। फिलहाल, मध्य रेलवे की तकनीकी और मरम्मत टीमें युद्धस्तर पर मलबे को हटाने और पटरियों को दुरुस्त करने के काम में जुटी हुई हैं।
इस प्राकृतिक आपदा की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि लोनावाला संभाग में बीते कुछ घंटों के भीतर रिकॉर्ड तोड़ बारिश दर्ज की गई है। मध्य रेलवे के प्रवक्ता स्वप्निल नीला ने स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि लोनावाला क्षेत्र में रविवार की रात 400 मिलीमीटर (एमएम) और सोमवार सुबह महज तीन घंटों के भीतर 145 एमएम की अभूतपूर्व बारिश दर्ज की गई। इतनी भारी बारिश के कारण ही ठाकुरवाड़ी स्टेशन के पास की पहाड़ी दरक गई और भारी मात्रा में मलबा पटरियों पर आ गिरा। रेलवे प्रशासन ने यात्रियों की सुविधा और असमंजस की स्थिति से बचाने के लिए रेलवे स्टेशनों के नोटिस बोर्ड, पब्लिक एड्रेस सिस्टम और इलेक्ट्रॉनिक व सोशल मीडिया के माध्यम से पल-पल की जानकारी अपडेट करना शुरू कर दिया है। प्रशासन ने यात्रियों से अपील की है कि वे घर से निकलने से पहले अपनी ट्रेन का शेड्यूल और लाइव स्टेटस जरूर चेक कर लें।
रद्द की गई ट्रेनों में मुख्य रूप से मुंबई (सीएसएमटी) और पुणे के बीच चलने वाली इंटरसिटी और एक्सप्रेस गाड़ियां शामिल हैं। रेलवे द्वारा जारी सूची के अनुसार, प्रभावित ट्रेनों में ट्रेन संख्या 22105/22106 (सीएसएमटी-पुणे-सीएसएमटी), 12169/12170 (पुणे-सोलापुर-पुणे), 12127/12128 (डेक्कन क्वीन एक्सप्रेस), 11007/11008 (डेक्कन एक्सप्रेस), 12123/12124 (डेक्कन क्वीन/सिंहगढ़), 12125/12126 (प्रगति एक्सप्रेस) के साथ-साथ 11010/11011 (पुणे-सीएसएमटी-धुले) एक्सप्रेस शामिल हैं। रेलवे के आधिकारिक सूत्रों का कहना है कि लाइन को जल्द से जल्द चालू करने के प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन लगातार हो रही बारिश और मलबे की मात्रा को देखते हुए यातायात पूरी तरह सामान्य होने में थोड़ा वक्त लग सकता है।
