धमतरी। मानसून की शुरुआत और रात के अंधेरे में नकटी के 85 परिवारों को बेघर किए जाने के प्रशासनिक फैसले ने अब एक बड़े सियासी बवाल का रूप ले लिया है। इस अमानवीय कार्रवाई के खिलाफ आक्रोश जताते हुए जिला कांग्रेस कमेटी ने शनिवार को गांधी मैदान में एक बड़ा प्रदर्शन किया। जिलाध्यक्ष तारिणी चंद्राकर के नेतृत्व में जुटे सैकड़ों कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का पुतला दहन कर अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया। कांग्रेस ने इस पूरी कार्रवाई को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए मांग की है कि पीड़ित परिवारों को तत्काल न्याय, उचित मुआवजा और सम्मानजनक पुनर्वास मिलना चाहिए।
इस दौरान जिलाध्यक्ष तारिणी चंद्राकर ने सरकार की संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि सिर छुपाने की आस खो चुके इन गरीब परिवारों के लिए पहले किसी वैकल्पिक व्यवस्था का न किया जाना प्रशासनिक क्रूरता को दर्शाता है। वहीं, विधायक ओंकार साहू ने इस लड़ाई को सीधे तौर पर ‘गरीब बनाम वीआईपी’ की जंग बताते हुए एक बड़ा खुलासा किया। उन्होंने बताया कि कांग्रेस के 13 विधायकों ने एकजुटता दिखाते हुए मुख्यमंत्री को साफ तौर पर पत्र लिख दिया है कि वे नकटी में गरीबों के आशियाने उजाड़कर बनाए जा रहे सर्वसुविधायुक्त सरकारी आवासों को स्वीकार नहीं करेंगे।
उन्होंने भाजपा के विधायकों को भी कटघरे में खड़ा करते हुए अपील की कि वे अपनी नैतिकता दिखाएं और इन आलीशान मकानों का मोह छोड़कर पीड़ित ग्रामीणों के हक में खड़े हों। कांग्रेस नेताओं का तर्क है कि यदि जनप्रतिनिधियों के लिए नए आवास इतने ही जरूरी हैं, तो इसके लिए नवा रायपुर की खाली शासकीय भूमि का उपयोग किया जाना चाहिए, न कि किसी गरीब की छत छीनकर।
गांधी मैदान में हुए इस तीखे प्रदर्शन में विधायक ओंकार साहू, पूर्व विधायक लक्ष्मी ध्रुव, मोहन लालवानी, शरद लोहाना, अरविंद दोषी, विजय गोलछा, कविता बाबर, आनंद पवार, योगेश शर्मा, गौतम वाधवानी और खिलेन्द्र ध्रुव समेत भारी संख्या में कांग्रेसी पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे। कांग्रेस ने साफ चेतावनी दी है कि जब तक नकटी में चल रही इस बेदखली की कार्रवाई पर तुरंत रोक नहीं लगाई जाती और विस्थापितों के हक में बड़ा फैसला नहीं होता, उनका यह आंदोलन थमेगा नहीं।
