धमतरी। भरोसे की आड़ में ग्रामीणों की जिंदगी भर की जमा-पूंजी डकारने का एक बेहद संवेदनशील मामला सामने आया है। भारतीय स्टेट बैंक के कोर्रा स्थित ग्राहक सेवा केंद्र (कियोस्क शाखा) के संचालक पर दर्जनों खाताधारकों के साथ लाखों रुपये की धोखाधड़ी करने का गंभीर आरोप लगा है। पिछले 12 सालों से जिस केंद्र पर ग्रामीण आंख मूंदकर भरोसा कर रहे थे, वहां वित्तीय हेरफेर का ऐसा जाल बुना गया कि अब पीड़ितों के पास कलेक्टर से गुहार लगाने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा है। जनदर्शन में पहुंचे ग्रामीणों ने अपनी खून-पसीने की कमाई वापस दिलाने और आरोपी के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
इस पूरे फर्जीवाड़े की शुरुआत साल 2013 से हुई, जो साल 2025 तक लगातार चलती रही। क्षेत्र के सीधे-साधे ग्रामीण अपनी बचत की राशि नियमित रूप से इस कियोस्क केंद्र में जमा करते थे। संचालक ग्रामीणों से नकदी तो ले लेता था, लेकिन बैंक के डिजिटल सिस्टम में उसे अपडेट करने के बजाय चालाकी से पासबुक में हाथ से ही एंट्री कर देता था। ग्रामीणों को इसका अंदाजा तब तक नहीं हुआ, जब तक वे अपनी जरूरत के लिए भारतीय स्टेट बैंक की मुख्य शाखा भखारा नहीं पहुंचे। वहां जब बैंक अधिकारियों ने बताया कि उनके खातों में तो पैसे हैं ही नहीं, तो ग्रामीणों के पैरों तले जमीन खिसक गई।
जब पीड़ितों ने इस गड़बड़ी को लेकर संचालक को घेरा, तो उसने टालमटोल शुरू कर दी। खुद को फंसता देख संचालक ने कुछ खाताधारकों को मामले को दबाने के लिए एचडीएफसी और इंडसइंड बैंक के चेक थमा दिए, जो बाद में बाउंस हो गए। हद तो तब हो गई जब कुछ ग्रामीणों को भरोसे में लेने के लिए बकायदा बांड पेपर तक दिए गए, जो जांच में पूरी तरह फर्जी पाए गए। इस ठगी का शिकार हुए अंजोर सिंह निषाद, लीलाराम साहू, अंकालू राम सिन्हा और सरोज बाई समेत दर्जनों ग्रामीणों ने भखारा थाने और एसबीआई प्रबंधन से भी शिकायत की है। अब देखना यह है कि प्रशासन इन गरीब ग्रामीणों को न्याय दिलाने के लिए कितनी तेजी से कार्रवाई करता है।
