रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित नाव्या मलिक ड्रग्स सिंडिकेट मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने आधिकारिक तौर पर एंट्री करते हुए मनी लॉन्ड्रिंग के कोण से अपनी बड़ी तफ्तीश शुरू कर दी है। इस हाईप्रोफाइल नेटवर्क की कमान संभाल रही नाव्या के रडार पर शहर के करीब 850 से अधिक अमीर और प्रभावशाली लोग थे, जिनकी भूमिका अब केंद्रीय जांच एजेंसी की कड़ियों में शामिल हो चुकी है। मंगलवार को ईडी सूत्रों और छत्तीसगढ़ पुलिस प्रशासन द्वारा संयुक्त रूप से सार्वजनिक की गई जानकारी के अनुसार, जांच एजेंसी ने मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए) के तहत विधिवत मामला दर्ज करने की प्रक्रिया को गति दे दी है। इस सिलसिले में रायपुर पुलिस से अब तक की केस डायरी, अदालत में पेश की जा चुकी चार्जशीट और जांच से जुड़े तमाम गोपनीय दस्तावेज तलब कर लिए गए हैं, ताकि इस अवैध कारोबार की वित्तीय परतों को बेनकाब किया जा सके।
ईडी का मुख्य फोकस इस पूरे ड्रग्स रैकेट के जरिए पैदा की गई काली कमाई के वित्तीय लेनदेन और उसके रूट यानी ‘मनी ट्रेल’ का पता लगाना है। वर्तमान में रायपुर की अदालत में इस मामले का ट्रायल जारी है, जहां पुलिस पहले ही प्राथमिक आरोप पत्र दाखिल कर चुकी है। नाव्या मलिक पर रायपुर के बेहद रसूखदार सर्किलों, निजी पार्टियों और क्लबों में एमडीएमए जैसे महंगे और प्रतिबंधित सिंथेटिक ड्रग्स की सप्लाई करने का संगीन आरोप है। जांच एजेंसियां अब इस कड़वे सच से पर्दा उठाने में जुटी हैं कि ड्रग्स के इस काले साम्राज्य से कमाए गए करोड़ों रुपयों को किस तरह अलग-अलग कानूनी माध्यमों से सफेद (व्हाइट मनी) दिखाने का प्रयास किया गया और यह पैसा किन-किन क्षेत्रों में खपाया गया।
इस पूरे सनसनीखेज कांड की शुरुआत पिछले साल 23 अगस्त 2025 को हुई थी, जब रायपुर पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए हर्ष आहूजा, मोनू विश्नोई और दीप धनोरिया को भारी मात्रा में एमडीएमए ड्रग्स के साथ दबोचा था। इन आरोपियों से कड़ाई से की गई पूछताछ में मिले सुरागों के आधार पर पुलिस की एक टीम ने मुंबई में दबिश देकर इंटीरियर डिजाइनर नाव्या मलिक को गिरफ्तार किया था। मूल रूप से रायपुर के कटोरा तालाब इलाके की रहने वाली नाव्या शहर के वीआईपी आयोजनों और हाईप्रोफाइल नाइट पार्टियों में खुद शामिल होकर ड्रग्स की खेप मुहैया कराती थी।
नाव्या की गिरफ्तारी के बाद उसके पास से जब्त किए गए तीन स्मार्टफोन्स ने इस पूरे सिंडिकेट का कच्चा चिट्ठा खोलकर रख दिया। मोबाइल डेटा की फोरेंसिक जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि वह शहर के करीब 850 रसूखदारों के सीधे संपर्क में थी। इस सिंडिकेट की जद में कई सफेदपोश राजनेता, नामी कारोबारी, आलीशान होटलों के संचालक, नाइट क्लबों के प्रबंधन से जुड़े लोग और शहर के कई नामी परिवारों के बिगड़े शहजादे शामिल हैं। पुलिस की शुरुआती जांच में एक मौजूदा विधायक के करीबी रिश्तेदार, ऑटोमोबाइल और होटल व्यवसाय से जुड़े दिग्गजों के नाम भी सामने आए थे, जबकि कई नाइट क्लबों के मैनेजर और बाउंसर इस नेटवर्क में मोहरे की तरह काम कर रहे थे। अब ईडी नाव्या के विदेशी दौरों और उसके साथ यात्रा करने वाले धनाढ्य संदिग्धों के बैंक खातों को खंगालकर इस पूरे ड्रग्स सिंडिकेट की रीढ़ तोड़ने की तैयारी में है।
