अम्बिकापुर। मूसलाधार बारिश की गड़गड़ाहट और घने अंधेरे के बीच अम्बिकापुर के बाल संप्रेक्षण गृह की सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह ताश के पत्तों की तरह ढह गई। यहाँ बंद 11 अपचारी बालक प्रबंधन को ठेंगा दिखाकर और पीछे की ऊंची दीवार फांदकर रफूचक्कर हो गए। इस दुस्साहसिक वारदात ने न सिर्फ संप्रेक्षण गृह की सुरक्षा पोल खोल दी है, बल्कि पूरे पुलिस महकमे और प्रशासनिक अमले में हड़कंप मचा दिया है। फरार हुए इन बालकों पर हत्या, दुष्कर्म और चोरी जैसे संगीन मामले दर्ज हैं, जिससे इलाके में दहशत का माहौल है। गांधीनगर थाना पुलिस ने शहर के चारों तरफ नाकाबंदी कर दी है, लेकिन अब तक कानून के हाथ खाली हैं।
यह पूरी वारदात किसी फिल्मी स्क्रिप्ट जैसी नजर आती है, जिसे बेहद शातिराना अंदाज में अंजाम दिया गया। शाम के करीब साढ़े सात बजे थे, सभी बच्चों ने अभी-अभी रात का खाना खाया ही था। कुछ बच्चे टीवी देखने में व्यस्त थे, तभी अचानक मौसम ने करवट ली। तेज गरज-चमक के साथ मूसलाधार बारिश शुरू हो गई और इसी दौरान बिजली भी गुल हो गई। इस घने अंधेरे और कड़कड़ाती बिजली के शोर का फायदा उठाकर बालकों ने बैरक की खिड़की पर धावा बोल दिया। उन्होंने न सिर्फ खिड़की तोड़ी, बल्कि पूरी की पूरी ग्रिल को उखाड़कर बाहर फेंक दिया। इसके बाद एक-एक कर 11 बालक संप्रेक्षण गृह के पीछे की ऊंची दीवार फांदकर घने अंधेरे में गायब हो गए। सबसे ज्यादा हैरान करने वाली बात यह है कि जिस वक्त यह सब हो रहा था, मुख्य गेट पर दो सुरक्षाकर्मी मुस्तैद थे, लेकिन उन्हें इस पूरी साजिश की भनक तक नहीं लगी।
संप्रेक्षण गृह के हाउस फादर मनीष कुशवाहा के अनुसार, इस पूरी साजिश के पीछे एक पुराने और आदतन शातिर अपराधी का हाथ होने की पूरी आशंका है। फरार हुए बालक सरगुजा, सूरजपुर और कोरिया जिले के हैं। इनमें से कुछ तो हाल ही में आए थे, लेकिन अम्बिकापुर का ही एक आदतन बाल अपराधी, जो पहले भी कई बार यहाँ आ चुका है और जिस पर कई थानों में मुकदमे दर्ज हैं, वह भी फरार सूची में शामिल है। माना जा रहा है कि इसी शातिर दिमाग ने बाकी बच्चों को बहला-फुसलाकर और डरा-धमकाकर भागने का यह फुलप्रूफ प्लान तैयार किया था।
फिलहाल, इस सामूहिक फरारी के बाद से पुलिस और प्रशासन के हाथ-पांव फूले हुए हैं। गांधीनगर थाना पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए पूरे शहर को छावनी में तब्दील कर दिया है। रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड और शहर के हर निकास द्वार पर सघन चेकिंग अभियान चलाया जा रहा है। पुलिस की विशेष टीमें फरार बालकों के परिजनों और उनके पुराने ठिकानों पर दबिश दे रही हैं। अधिकारी जल्द ही सभी को दोबारा सलाखों के पीछे लाने का दावा तो कर रहे हैं, लेकिन इस घटना ने बाल संप्रेक्षण गृहों की सुरक्षा और प्रबंधन की लापरवाही पर एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा कर दिया है।
