रायपुर। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी आज करीब तीन साल के लंबे इंतजार के बाद छत्तीसगढ़ की धरा पर कदम रख रहे हैं। उनके इस दौरे से प्रदेश की सियासत का पारा अचानक गरमा गया है। राहुल गांधी सीधे अभनपुर में चल रहे कांग्रेस के प्रांतीय प्रशिक्षण शिविर में शामिल होंगे, जहां वे पार्टी के नवनियुक्त 41 जिलाध्यक्षों और जमीनी कार्यकर्ताओं में जोश भरेंगे।
सितंबर 2023 के विधानसभा चुनाव प्रचार के बाद यह पहला मौका है जब राहुल छत्तीसगढ़ आ रहे हैं, जिसे कांग्रेस संगठन को नए सिरे से खड़ा करने और कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा फूंकने के बड़े अभियान के रूप में देखा जा रहा है। 20 से 29 जून तक चलने वाले इस महा-प्रशिक्षण कार्यक्रम में राहुल गांधी न सिर्फ संगठन विस्तार और बूथ मैनेजमेंट का पाठ पढ़ाएंगे, बल्कि नए जिलाध्यक्षों को उनके काम की ‘टार्गेट शीट’ सौंपकर जवाबदेही भी तय करेंगे।
राहुल गांधी के इस दौरे को लेकर जितनी उत्सुकता कांग्रेस खेमे में है, उतनी ही तल्खी सत्तापक्ष यानी भाजपा के बयानों में नजर आ रही है। उनके रायपुर पहुंचने से पहले ही सूबे में सियासी तीर चलने शुरू हो गए हैं। साय सरकार के कद्दावर मंत्री केदार कश्यप ने पुराने शराब घोटाले का जिक्र करते हुए कांग्रेस पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप जड़े और राहुल के स्वागत की तैयारियों पर तीखा तंज कसा।
वहीं, पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने भी चुटकी लेने में कसर नहीं छोड़ी; उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि राहुल गांधी देश में जहां-जहां जाते हैं, वहां कांग्रेस का बंटाधार होना तय है, इसलिए उनका छत्तीसगढ़ आना भाजपा के लिए फायदेमंद ही होगा। इस सियासी घमासान के बीच, कांग्रेस नेताओं का साफ कहना है कि यह दौरा पूरी तरह संगठनात्मक मजबूती और आगामी चुनाव की रणनीति तैयार करने के लिए है, जो राज्य की राजनीति में कांग्रेस की तकदीर बदलने वाला साबित होगा।
