नई दिल्ली। देश के करोड़ों किसानों को बैंकिंग सिस्टम से मिलने वाले कर्ज को और अधिक पारदर्शी तथा व्यवस्थित बनाने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने शुक्रवार को किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) योजना के नियमों में बड़े बदलावों की घोषणा की है। ‘आरबीआई निर्देश 2026’ के नाम से जारी ये नए नियम अगले साल जनवरी से देश भर में प्रभावी हो जाएंगे। केंद्रीय बैंक के इस कदम का मुख्य उद्देश्य कर्ज मंजूर करने और उसे चुकाने की समय-सीमा में एकरूपता लाना है, जिसके लिए अब ‘फसल सीजन’ की परिभाषा को नए सिरे से तय किया गया है।
आरबीआई द्वारा जारी किए गए इन नए निर्देशों के पीछे का मुख्य मकसद खेती और उससे जुड़ी अन्य गतिविधियों में लगे किसानों की कार्यशील पूंजी (working capital) और निवेश ऋण की जरूरतों को समय पर पूरा करना है। नए नियमों के तहत फसल मौसम की अवधि को बैंकिंग क्षेत्र के ‘आय पहचान और संपत्ति वर्गीकरण’ (IRAC) नियमों के अनुकूल बनाया गया है। अब से केसीसी योजना के अंतर्गत कम समय में तैयार होने वाली ‘अल्पावधि फसलों’ के लिए फसल सीजन की अवधि अधिकतम 12 महीने और ‘दीर्घावधि फसलों’ (लंबे समय में पकने वाली फसलों) के लिए यह अवधि 18 महीने निर्धारित की गई है। इस पूरी अवधि की गणना फसल की बुवाई से लेकर उसकी कटाई और बाजार में उसकी बिक्री (विपणन) तक के समय के आधार पर होगी।
गौरतलब है कि इन अंतिम नियमों को लागू करने से पहले केंद्रीय बैंक ने इस साल फरवरी में एक मसौदा (ड्राफ्ट) जारी कर आम जनता और कृषि क्षेत्र से जुड़े हितधारकों से सुझाव मांगे थे। इस प्रक्रिया के दौरान किसानों को बिना किसी गारंटी (जमानत) के मिलने वाले लोन की सीमा को बढ़ाने की मांग भी उठी थी, जिसे आरबीआई ने फिलहाल खारिज कर दिया है। बैंक का कहना है कि दिसंबर 2024 में ही बिना गारंटी वाले लोन की सीमा में बढ़ोतरी की जा चुकी है, इसलिए फिलहाल इसे और बढ़ाने का कोई विचार नहीं है। हालांकि, नियमों को व्यावहारिक बनाते हुए आरबीआई ने यह साफ किया है कि यदि कोई किसान ₹2 लाख तक के कृषि ऋण के लिए अपनी मर्जी से सोना या चांदी गिरवी रखना चाहता है, तो इसे बिना गारंटी वाले लोन के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन नहीं माना जाएगा।
मालूम हो कि भारत सरकार द्वारा शुरू की गई किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) योजना देश के ग्रामीण परिवेश और कृषि अर्थव्यवस्था की रीढ़ रही है। इस योजना का मूल उद्देश्य किसानों को खेती, पशुपालन, डेयरी और मछली पालन जैसे कार्यों के लिए बेहद किफायती और रियायती ब्याज दरों पर संस्थागत लोन उपलब्ध कराना है, ताकि उन्हें साहूकारों के चंगुल से बचाया जा सके। एक निश्चित सीमा तक के कर्ज के लिए किसानों को बैंकों के पास अपनी जमीन या कोई अन्य संपत्ति बंधक रखने की जरूरत नहीं होती है। अब जनवरी से लागू होने वाले इन नए बदलावों के बाद, किसानों के लिए कर्ज लेने और उसे अपनी फसल की बिक्री के अनुसार चुकाने की प्रक्रिया पहले से कहीं अधिक स्पष्ट और सुलभ हो जाएगी।
