रायपुर। छत्तीसगढ़ में दोबारा आयोजित होने जा रही नीट यूजी (NEET-UG) परीक्षा को लेकर इस बार सुरक्षा और व्यवस्था के ऐसे अभूतपूर्व इंतजाम किए गए हैं, जिसकी पहले कभी कल्पना नहीं की गई थी। परीक्षा में किसी भी तरह की डिजिटल सेंधमारी या नकल को रोकने के लिए सभी परीक्षा केंद्रों पर अत्याधुनिक 5G जैमर तैनात कर दिए गए हैं, जिससे मोबाइल फोन या कोई भी अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण पूरी तरह बेकार हो जाएंगे। परीक्षा की संवेदनशीलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि प्रश्नपत्रों को विशेष रूप से वायुसेना के विमान से रायपुर पहुंचाया गया है।
हवाई अड्डे से लेकर बैंकों के सुरक्षित लॉकर तक इन प्रश्नपत्रों को सीआरपीएफ (CRPF) और सीआईएसएफ (CISF) के हथियारों से लैस जवानों की कड़ी निगरानी में रखवाया गया है। इसके साथ ही एक हाई-टेक सेंट्रल कंट्रोल रूम भी सक्रिय किया गया है, जहां से हर केंद्र की लाइव ऑनलाइन मॉनिटरिंग की जाएगी। इस पूरी व्यवस्था को जमीन पर सुचारू रूप से लागू करने की जिम्मेदारी सभी जिलों में कलेक्टर और एसपी के नेतृत्व में बनी एक उच्च स्तरीय कमेटी को सौंपी गई है।
इस बार प्रदेश भर के 42 हजार से अधिक छात्र नीट यूजी की परीक्षा में शामिल होने जा रहे हैं। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने न सिर्फ सुरक्षा बढ़ाई है, बल्कि छात्रों की सहूलियत के लिए नियमों में भी कुछ महत्वपूर्ण ढील दी है। पिछले अनुभवों को देखते हुए इस बार परीक्षार्थियों को पेपर हल करने के लिए 15 मिनट का अतिरिक्त समय दिया जाएगा, और इसके साथ ही रफ कार्य के लिए प्रश्नपुस्तिका में दो अतिरिक्त पन्ने भी बढ़ाए गए हैं। गौरतलब है कि 3 मई को आयोजित हुई पिछली परीक्षा के दौरान देश के कई हिस्सों में पेपर लीक के गंभीर आरोप लगे थे, जिसके बाद भारी विवाद खड़ा हुआ और मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया था।
हालांकि न्यायालय ने पूरी परीक्षा को रद्द करने के खिलाफ फैसला सुनाया था, लेकिन छत्तीसगढ़ के बालोद और दंतेवाड़ा जैसे केंद्रों पर हुई गंभीर प्रशासनिक गड़बड़ियों के कारण वहां दोबारा परीक्षा कराने का निर्णय लिया गया। पिछले आयोजन में दंतेवाड़ा में हिंदी माध्यम के छात्रों को अंग्रेजी का पर्चा थमा दिया गया था, वहीं बालोद में गलत वितरण के बाद रिजर्व पेपर बांटने में आधा घंटा बर्बाद हुआ था। इसी तरह की चूकों से सबक लेते हुए एनटीए ने अब निजी स्कूलों और कॉलेजों को सेंटर बनाने की परंपरा को पूरी तरह खत्म कर दिया है। अब यह परीक्षा केवल प्रतिष्ठित सरकारी शिक्षण संस्थानों, शासकीय कॉलेजों, यूटीडी, आईआईटी और एनआईटी जैसे बड़े केंद्रों पर ही आयोजित की जा रही है।
राज्य के इन 42 हजार से अधिक डॉक्टर बनने के चाहवान युवाओं के लिए दांव पर बहुत कुछ लगा है, क्योंकि प्रदेश के सरकारी और निजी मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस की सीटों के लिए मुकाबला बेहद कड़ा है। वर्तमान सीट मैट्रिक्स के अनुसार, रायपुर में 230, दुर्ग में 200 और बिलासपुर में 150 सीटें उपलब्ध हैं। इसके अलावा अम्बिकापुर, कोरबा, राजनांदगांव, महासमुंद, कांकेर और जगदलपुर के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में प्रत्येक में 125-125 सीटें हैं, जबकि रायगढ़ में 100 सीटें हैं। निजी क्षेत्र के मेडिकल कॉलेजों की बात करें तो बालाजी और शंकराचार्य कॉलेज में 250-250 सीटें, रिम्स और अभिषेक मेडिकल कॉलेज में 150-150 सीटें, तथा रावतपुरा में 100 सीटें शामिल हैं।
