रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी के रायपुर रेलवे स्टेशन पर यात्रियों की जेब काटने वाले एक बड़े ‘चाय घोटाले’ का पर्दाफाश हुआ है, जिसने रेलवे के गुणवत्ता नियंत्रण और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्टेशन पर चाय-कॉफी की बिक्री के लिए तय मानकों से छोटे कपों का इस्तेमाल कर यात्रियों को लंबे समय से चूना लगाया जा रहा था। इस धोखाधड़ी की पुष्टि होने के बाद नापतौल विभाग ने कड़ा रुख अपनाते हुए गुढ़ियारी स्थित आपूर्ति कर्ता ‘आदित्य पेपर फर्म’ और उसके एक साझेदार पर 20-20 हजार रुपए, यानी कुल 40 हजार रुपए का भारी-भरकम जुर्माना ठोक दिया है। विभाग ने इस कार्रवाई को अंतिम अंजाम तक पहुंचाते हुए अब जब्त किए गए कम क्षमता वाले लाखों कपों को पूरी तरह नष्ट करने की कानूनी प्रक्रिया भी शुरू कर दी है।
इस पूरे फर्जीवाड़े का खुलासा तब हुआ जब रायपुर रेल मंडल के वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक (सीनियर डीसीएम) और नापतौल विभाग की एक संयुक्त टीम ने अचानक रेलवे स्टेशन परिसर में दबिश दी। इस छापेमारी के दौरान टीम ने स्टेशन से कम क्षमता वाले संदिग्ध कपों से भरे 14 बड़े बोरे जब्त कर सील किए थे। इसके बाद इन कपों को वैज्ञानिक परीक्षण के लिए नापतौल विभाग की प्रयोगशाला भेजा गया, जहां जांच में यह साबित हो गया कि कपों का आकार विधिक मानकों से काफी कम था। जिला नापतौल अधिकारी आर.एस. सोरी के मुताबिक, ये कप सीधे तौर पर उपभोक्ताओं को भ्रमित करने और उन्हें आर्थिक नुकसान पहुंचाने के लिए तैयार किए गए थे, जिसके कारण विभाग अब इन्हें पूरी तरह नष्ट करने के लिए आधिकारिक पत्र जारी कर रहा है।
इस मामले का सबसे चौंकाने वाला और गंभीर पहलू यह है कि जब्त किए गए इन सभी कपों पर बकायदा आईआरसीटीसी (IRCTC) का लोगो छपा हुआ था। आरोपी फर्म इसी प्रतिष्ठित लोगो का ढाल के रूप में इस्तेमाल कर यात्रियों को यह भरोसा दिलाती थी कि उन्हें सही मात्रा में पेय पदार्थ मिल रहा है, जबकि असलियत में कप छोटे होने के कारण उन्हें तय मात्रा से बहुत कम चाय या कॉफी परोसी जा रही थी। अंदरूनी सूत्रों का दावा है कि स्टेशन पर 5 रुपए की लागत वाली चाय को 10 रुपए की क्षमता वाले कप में दिखाकर बेचा जा रहा था। इसका सीधा मतलब यह है कि हर एक कप पर यात्रियों से लगभग 5 रुपए की अवैध वसूली की जा रही थी और प्रतिदिन सफर करने वाले हजारों बेकसूर यात्री इस संगठित ठगी का शिकार बन रहे थे।
हैरानी की बात यह है कि इतना बड़ा खुलासा होने और नापतौल विभाग द्वारा जुर्म साबित कर देने के बाद भी रेलवे प्रशासन रहस्यमयी चुप्पी साधे बैठा है। आईआरसीटीसी के नाम का दुरुपयोग कर यात्रियों को ठगने वाली इस फर्म के खिलाफ रेलवे की ओर से अब तक कोई ठोस दंडात्मक या दरोगात्मक कार्रवाई नहीं की गई है। हालांकि, चौतरफा घिरने के बाद रेलवे के आला अधिकारी अब यह दलील दे रहे हैं कि मामले की पूरी जानकारी जुटाई जा रही है और संबंधित फर्म के खिलाफ नियमानुसार सख्त कदम उठाए जाएंगे। फिलहाल, हर दिन ठगे जा रहे हजारों यात्रियों और आम जनता की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि रेलवे इस गंभीर लापरवाही पर जागता कब है और दोषियों पर क्या कार्रवाई करता है।
