जशपुर। छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले में कर्तव्य के प्रति घोर लापरवाही, अनुशासनहीनता और लगातार बिना सूचना के गायब रहने वाले पांच पुलिस आरक्षकों पर गाज गिरी है। जशपुर के पुलिस कप्तान, डीआईजी एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. लाल उमेद सिंह ने छत्तीसगढ़ पुलिस रेगुलेशन के नियम 221(अ) के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए यह बड़ी दंडात्मक कार्रवाई की है। विभागीय जांच पूरी होने के बाद जारी किए गए अंतिम आदेश में तीन आरक्षकों को सेवा से पृथक (बर्खास्त) कर दिया गया है, जबकि दो अन्य आरक्षकों के खिलाफ वेतन वृद्धि रोकने और न्यूनतम वेतनमान पर लाने जैसी गंभीर दंडात्मक कार्रवाई की गई है। पुलिस विभाग की इस कड़ी कार्रवाई से महकमे में हड़कंप मच गया है।
लंबी अवधि तक अनाधिकृत रूप से गैर-हाजिर रहकर कर्तव्य के प्रति स्वेच्छाचारिता और लापरवाही बरतने के कारण इन पांचों आरक्षकों के खिलाफ विभागीय जांच शुरू की गई थी। इन कर्मियों ने छत्तीसगढ़ पुलिस रेगुलेशन 64(2) और छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम 1965 के नियम 3 के उप-नियम 1(एक), (दो) व (तीन) का स्पष्ट उल्लंघन किया था। विभाग द्वारा बार-बार सुधरने का अवसर दिए जाने के बाद भी इनके आचरण में कोई सुधार नहीं देखा गया, जिसके बाद पुलिस अधीक्षक ने यह सख्त कदम उठाया।
जिन तीन आरक्षकों को नौकरी से बर्खास्त किया गया है, उनका ट्रैक रिकॉर्ड लगातार अनुशासनहीनता से भरा रहा है। इनमें आरक्षक क्रमांक 737 संतोष कुमार राम शामिल हैं, जो अपनी 13 वर्ष की सेवा में 33 बार अलग-अलग समय पर कुल 469 दिन बिना बताए गायब रहे। उनके पूरे सेवाकाल में उन्हें 23 बार सजा मिल चुकी थी। इसी तरह, आरक्षक क्रमांक 525 नेल्सन तिग्गा अपनी 17 वर्ष की सेवा में 28 बार में कुल 923 दिन गैर-हाजिर रहे। विभागीय जांच के दौरान नोटिस दिए जाने के बावजूद वे उपस्थित नहीं हो रहे थे। तीसरे आरक्षक क्रमांक 394 अशोक कुमार एक्का ने तो अपनी 20 वर्ष की सेवा में कुल 1151 दिन अनाधिकृत रूप से गायब रहकर स्वेच्छाचारिता की सारी हदें पार कर दी थीं। उन्हें पूर्व में 19 बार निंदा और कई बार वेतन वृद्धि रोकने की सजा मिल चुकी थी। आचरण में सुधार न होने के कारण इन तीनों को सेवा से पृथक कर दिया गया है।
वहीं, शेष दो आरक्षकों को उनकी सेवा पुस्तिका के अवलोकन के बाद कड़ा आर्थिक दंड दिया गया है। आरक्षक क्रमांक 47 इरीमियस कुजूर को, जो 17 वर्ष की सेवा में 139 दिन बिना अनुमति गायब रहे, ‘एक वेतन वृद्धि के बराबर धनराशि की कमी संचयी प्रभाव से’ दंडित किया गया है। इसके अलावा, आरक्षक क्रमांक 144 बिन्देश्वर राम को, जो 18 वर्ष की सेवा में 216 दिन गैर-हाजिर रहे, ‘आरक्षक के न्यूनतम वेतनमान’ पर लाने का दंड दिया गया है, जिसका सीधा असर उनकी भविष्य की वेतन वृद्धि और पेंशन पर भी पड़ेगा।
इस मामले की जानकारी देते हुए डीआईजी एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. लाल उमेद सिंह ने स्पष्ट रूप से कहा कि पुलिस विभाग में किसी भी स्तर पर अनुशासनहीनता, उदासीनता और स्वेच्छाचारिता कतई बर्दाश्त नहीं की जाएगी और ऐसे लापरवाह पुलिसकर्मियों के खिलाफ आगे भी इसी तरह की सख्त विभागीय कार्रवाई जारी रहेगी।
