रायपुर। छत्तीसगढ़ इन दिनों भीषण गर्मी और जानलेवा हीटवेव (लू) की चपेट में है। पारे के इस खौफनाक उछाल का असर अब इंसानों के साथ-साथ जंगलों के मूक बाशिंदों पर भी दिखने लगा है। राज्य के विभिन्न इलाकों से मोर, चमगादड़, कबरबिज्जू और पाम सिवेट समेत कई दुर्लभ जंगली जीवों की मौत की दर्दनाक खबरें सामने आ रही हैं, जिसने वन विभाग की चिंताएं बढ़ा दी हैं।
हाल ही में खैरागढ़ जिले के दल्लीखोली-लछना के जंगलों में करीब 10 वन्यजीव मृत अवस्था में पाए गए, जिनमें मोर और कबरबिज्जू भी शामिल हैं। इस घटना पर खैरागढ़ के डीएफओ पंकज राजपूत ने आधिकारिक बयान जारी करते हुए बताया कि पशु चिकित्सकों के प्रारंभिक निरीक्षण के आधार पर इन जानवरों की मौत की वजह भीषण गर्मी और हीटस्ट्रोक (लू) होने का अंदेशा है।
हालांकि, मौत के सटीक कारणों का पता लगाने के लिए बिलासपुर के कानन पेंडारी से आई विशेष पशु चिकित्सकों की टीम ने मृत पशु-पक्षियों का पोस्टमॉर्टम किया है। इस पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी भी कराई गई है। डीएफओ के मुताबिक, फॉरेंसिक जांच के लिए मृत जीवों के विसरा सैंपल और संबंधित क्षेत्र के वॉटर होल्स से पानी के नमूने लैब भेजे गए हैं, जिनकी अंतिम रिपोर्ट आना अभी बाकी है।
वन्यजीवों पर गर्मी का यह कहर सिर्फ खैरागढ़ तक ही सीमित नहीं है। दो दिन पहले कांकेर जिले के सरोना गांव में लू की वजह से करीब 500 चमगादड़ों की सामूहिक मौत हो गई थी। इसी तरह, कोरबा जिले के पाली इलाके में भी लगभग 200 चमगादड़ मृत पाए गए, जिससे पर्यावरणविद् और स्थानीय प्रशासन बेहद चिंतित हैं।
इस भयावह स्थिति और हीटवेव के खतरे को देखते हुए वन विभाग और चिड़ियाघर प्रशासन ने बेजुबान वन्यजीवों को बचाने के लिए युद्ध स्तर पर प्रयास शुरू कर दिए हैं। वन मंत्री के मार्गदर्शन में जंगलों के भीतर सूख चुके पारंपरिक जलस्रोतों की जगह टैंकरों के माध्यम से कृत्रिम वॉटर होल (पानी के गड्ढों) को लगातार भरा जा रहा है, ताकि जंगली जानवर प्यास से न मरें। दूसरी ओर, भिलाई के प्रसिद्ध मैत्रीबाग चिड़ियाघर में बाघों, भालुओं और अन्य दुर्लभ प्रजातियों को राहत देने के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं।
जानवरों के पिंजरों में खस की टट्टियां और बड़े कूलर लगाए गए हैं, जबकि बाड़ों में लगातार ठंडक बनाए रखने के लिए स्प्रिंकलर (पानी छिड़कने वाले यंत्र), फॉगर्स और कृत्रिम झरने सक्रिय कर दिए गए हैं। इसके साथ ही, वन्यजीवों को डिहाइड्रेशन (पानी की कमी) से बचाने के लिए उनके दैनिक खान-पान में रसीले फल और ओआरएस (ORS) का घोल भी शामिल किया गया है।
