अम्बिकापुर। छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले के सीतापुर में भाजपा विधायक और उनके समर्थकों द्वारा नायब तहसीलदार के साथ की गई मारपीट का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। प्रशासनिक हलकों में मचे बवाल के बीच इस घटना पर राज्य के पूर्व उप मुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव की बड़ी प्रतिक्रिया सामने आई है। सिंहदेव ने किसी का नाम लिए बिना सत्ता पक्ष के जनप्रतिनिधियों को कड़े शब्दों में लोकतांत्रिक मर्यादाओं की याद दिलाई है। उन्होंने राजपुर उप तहसील में पदस्थ नायब तहसीलदार तुषार मानिक के साथ हुई इस घटना को अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि अगर पुलिस में एफआईआर दर्ज हुई है, तो निश्चित तौर पर कोई न कोई गंभीर घटना घटित हुई है।
पूर्व उप मुख्यमंत्री ने जनप्रतिनिधियों की मानसिकता पर सवाल उठाते हुए कहा कि चुनाव जीतने का अर्थ यह कतई नहीं होता कि आप जो चाहें वो करें या जो आप कहें सिर्फ वही सही हो। मतदाताओं ने 5 साल के लिए संवैधानिक व्यवस्थाओं और कानून के दायरे में रहकर जनता की सेवा और विकास करने का अवसर दिया है, न कि निरंकुश मनमानी करने का। सिंहदेव ने दो टूक शब्दों में कहा कि जहां जनता ने सत्ता में रहकर देखरेख की जिम्मेदारी सौंपी है, वहां अगर प्रशासनिक तंत्र से मनमानी की अपेक्षा रखी जाएगी, तो वह प्रजातंत्र नहीं कहलाएगा। उन्होंने नसीहत दी कि यदि जनप्रतिनिधियों में इस परिपक्वता की कमी है, तो उन्हें इसे जल्द से जल्द हासिल करना होगा।
इसी मामले में सूबे के पूर्व मंत्री अमरजीत भगत ने भी तीखा रुख अपनाते हुए राज्य सरकार के सुशासन के दावों को आड़े हाथों लिया है। उन्होंने वर्तमान स्थिति पर तंज कसते हुए कहा कि प्रदेश में विष्णुदेव साय की सरकार का ‘सुशासन’ चल रहा है और यहाँ खुलेआम अधिकारी पीटे जा रहे हैं। भगत ने इस बात पर गहरी आपत्ति जताई कि मारपीट जैसी घटना में एक जिम्मेदार विधायक और उनके साथियों का नाम सीधे तौर पर सामने आ रहा है, जिसका उल्लेख खुद पीड़ित नायब तहसीलदार ने अपने आधिकारिक बयान में किया है।
पूर्व मंत्री ने प्रशासनिक और राजनीतिक मर्यादाओं का हवाला देते हुए कहा कि जब कोई व्यक्ति जनप्रतिनिधि बनता है, तो उसे नियम-प्रक्रियाओं और प्रशासनिक सीमाओं का पूरा ज्ञान होना चाहिए। उन्होंने विधायक के रवैये की आलोचना करते हुए कहा कि जनप्रतिनिधि होने का यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि आप कानून हाथ में लेकर किसी के साथ भी ‘सिंघम स्टाइल’ में मारपीट शुरू कर दें। गौरतलब है कि यह पूरी घटना 27 मई की शाम को तब घटित हुई, जब विधायक की चचेरी बहन से कार्यालय में बदसलूकी के आरोप के बाद विधायक समर्थकों और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच टकराव की स्थिति निर्मित हो गई थी।
