अम्बिकापुर। छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले से इस वक्त की सबसे बड़ी और हाई-प्रोफाइल खबर सामने आ रही है, जिसने सियासी और प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। सीतापुर विधानसभा सीट से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के फायरब्रांड विधायक रामकुमार टोप्पो और उनके समर्थकों के खिलाफ शासकीय कार्य में बाधा डालने और नायब तहसीलदार तुषार मानिकपुरी से सरेराह मारपीट करने के आरोप में गंभीर गैर-जमानती धाराओं के तहत अपराध दर्ज किया गया है। इस पूरे बवाल पर अब सूबे की सियासत गरमा गई है और पूर्व खाद्य मंत्री अमरजीत भगत ने विष्णुदेव साय सरकार के सुशासन पर बड़ा हमला बोला है। पूर्व मंत्री अमरजीत भगत ने दो टूक शब्दों में कहा है कि साय सरकार के तथाकथित सुशासन में अब कानून के रखवाले और प्रशासनिक अधिकारी ही सरेआम पिट रहे हैं। एसडीएम के सामने तहसीलदार से मारपीट की यह घटना सरासर अन्याय है और यदि मान-सम्मान व प्रशासनिक गरिमा को बनाए रखना है, तो इस गुंडागर्दी के खिलाफ तत्काल सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
पूर्व मंत्री अमरजीत भगत ने विधायक रामकुमार टोप्पो पर तीखा निशाना साधते हुए कहा कि इस पूरे मामले में सबसे आपत्तिजनक बात यह है कि मारपीट की इस घटना में खुद क्षेत्र के विधायक का नाम सामने आ रहा है। उन्होंने नसीहत देते हुए कहा कि जब कोई भी व्यक्ति जनप्रतिनिधि बनता है, तो उसे नियम-प्रक्रिया और प्रशासनिक मर्यादा का ध्यान रखना चाहिए। अगर अधिकारी या कर्मचारी काम नहीं कर रहे हैं, तो लोकतंत्र में एक तय प्रक्रिया होती है, आप उनका ट्रांसफर करवाइए, उन्हें सस्पेंड करवाइए; लेकिन सरेआम सड़क पर इस तरह ‘सिंघम स्टाइल’ में मारपीट करना कौन सी प्रशासनिक प्रक्रिया है? श्री भगत ने इस दौरान प्रशासनिक लापरवाही पर भी गंभीर सवाल उठाए और कहा कि विधायक रामकुमार टोप्पो द्वारा मारपीट की यह कोई पहली घटना नहीं है, इससे पूर्व भी वे तीन-चार बार ऐसी घटनाओं को अंजाम दे चुके हैं। पूर्व में हुई घटनाओं पर कार्रवाई करने के बजाय हर बार मामले को आपसी समझौते से रफा-दफा करने का प्रयास किया गया, जिसका नतीजा आज सबके सामने है। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि आज अगर एसडीएम और तहसीलदार पिट रहे हैं, तो वह दिन दूर नहीं जब आने वाले समय में जिले के कलेक्टर और एसपी भी ऐसी हिंसक घटनाओं के शिकार हो जाएंगे।
गौरतलब है कि यह पूरा विवाद उस समय कानूनी और राजनीतिक जंग में तब्दील हो गया जब अम्बिकापुर कोतवाली पुलिस ने सीतापुर तहसील के अंतर्गत उप तहसील राजापुर में पदस्थ नायब तहसीलदार तुषार मानिकपुरी की लिखित शिकायत पर शून्य (जीरो) पर प्राथमिकी कायम की। पुलिस ने एक्शन लेते हुए भाजपा विधायक रामकुमार टोप्पो के साथ-साथ उनके करीब 10 से 14 समर्थकों, जिनमें यूसुफ, नाजिम राजा और पंकज गुप्ता शामिल हैं, के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 221, 221(1), 132 और 191(2) जैसी गंभीर गैर-जमानती धाराओं के तहत जुर्म दर्ज कर लिया है। बताया जा रहा है कि इस पूरे फसाद की जड़ विधायक रामकुमार टोप्पो की चचेरी बहन सीमा तिर्की और नायब तहसीलदार तुषार मानिकपुरी के बीच दफ्तर में हुई तीखी बहस थी, जिसने राजपुर चौराहे पर हिंसक रूप ले लिया।
हालांकि, मामला यहीं नहीं थमा और कुछ ही घंटों में सरगुजा पुलिस ने इस मामले में ‘काउंटर एफआईआर’ दर्ज कर ली। एक तरफ जहाँ विधायक और उनके समर्थकों पर गैर-जमानती शिकंजा कसा है, वहीं दूसरी तरफ विधायक की चचेरी बहन सीमा तिर्की की शिकायत पर नायब तहसीलदार तुषार मानिकपुरी के खिलाफ भी सीतापुर थाने में मामला दर्ज कर लिया गया है। महिला का आरोप है कि नायब तहसीलदार ने दफ्तर के भीतर उनके साथ जातिगत गाली-गलौज की, अश्लील इशारे किए और बदसलूकी करते हुए उन्हें जबरन धक्का देकर ऑफिस से बाहर निकाल दिया। पुलिस ने तहसीलदार के खिलाफ बीएनएस (BNS) की धारा 296, 351(2) और 79 के तहत जमानती अपराध दर्ज किया है। एक तरफ शासकीय अधिकारी से सरेराह मारपीट और दूसरी तरफ दफ्तर के भीतर महिला अस्मत से खिलवाड़ के आरोपों के बीच सरगुजा की यह जंग अब पूरी तरह से आर-पार की हो चुकी है, जिसने छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक नया भूचाल ला दिया है।
