फटाफट डेस्क। साल 2026 हिंदू पंचांग और ज्योतिष के नजरिए से एक बेहद दुर्लभ और अनोखा संयोग लेकर आया है, जिसने आम लोगों से लेकर मौसम वैज्ञानिकों तक कौतूहल बढ़ा दिया है। इस बार मलमास यानी अधिक मास के कारण ज्येष्ठ का महीना 30 दिनों के बजाय लगभग 60 दिनों का होने जा रहा है। पंचांग में महीनों के इस विस्तार ने हवा में एक बड़ा सवाल तैरने पर मजबूर कर दिया है कि क्या इस साल भीषण गर्मी का प्रतीक माना जाने वाला ‘नौतपा’ भी दो बार आग उगलेगा? इस उत्सुकता को शांत करते हुए ज्योतिषियों और खगोलविदों ने साफ किया है कि भले ही इस साल दो ज्येष्ठ मास पड़ रहे हों, लेकिन नौतपा का आना कैलेंडर के महीनों पर नहीं बल्कि सूर्य की चाल पर निर्भर करता है। यही वजह है कि दो महीने का ज्येष्ठ होने के बावजूद नौतपा इस साल सिर्फ एक ही बार आएगा और अपनी तपिश से लोगों को हैरान करेगा।
धार्मिक और खगोलीय गणनाओं के अनुसार, नौतपा की शुरुआत तब होती है जब सूर्य देव रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करते हैं। चूंकि सूर्य पूरे वर्ष में केवल एक ही बार रोहिणी नक्षत्र में जाते हैं और वहां करीब 15 दिनों तक रहते हैं, इसलिए इसके शुरुआती 9 दिनों को ही नौतपा कहा जाता है। इस साल यह तपिश भरा दौर 25 मई से शुरू होकर 2 जून तक चलने वाला है, जो उत्तर और मध्य भारत के लिए साल का सबसे गर्म समय माना जाता है। इन नौ दिनों के दौरान सूर्य की किरणें पृथ्वी पर बिल्कुल सीधी पड़ती हैं, जिससे कई इलाकों में पारा 45 डिग्री सेल्सियस को पार कर 50 डिग्री के करीब पहुंचने की आशंका जताई जा रही है। मौसम विभाग ने भी इस दौरान आम जनता को भीषण लू (हीटवेव) से बचने और शरीर में पानी की कमी न होने देने की सलाह दी है।
इस साल की गर्मी सिर्फ सूरज की सीधी किरणों की वजह से ही खास नहीं है, बल्कि इसके पीछे 27 साल बाद बन रहा एक बेहद दुर्लभ ग्रहीय संयोग भी है। ज्योतिषियों का दावा है कि करीब सत्ताइस वर्षों के बाद ऐसा पहली बार हो रहा है जब नौतपा के इन 9 दिनों के भीतर दो मंगलवार पड़ रहे हैं। ज्योतिष शास्त्र में मंगलवार का संबंध मंगल ग्रह से है, जिसे अग्नि, ऊर्जा और ऊष्मा का कारक माना जाता है। दो मंगलावारों का यह दुर्लभ योग इस बात का संकेत दे रहा है कि इस बार की गर्मी पिछले कई सालों के रिकॉर्ड तोड़ सकती है। हालांकि वैज्ञानिक इस ग्रहीय संयोग को मौसम से नहीं जोड़ते, लेकिन पारंपरिक मान्यताओं में इसे लेकर खासी चर्चा है।
दिलचस्प बात यह है कि नौतपा की इस असहनीय गर्मी का सीधा संबंध आने वाले अच्छे मानसून से भी जुड़ा हुआ है। देश की पारंपरिक और कृषि मान्यताओं के अनुसार, नौतपा के दौरान जितनी तेज गर्मी पड़ती है, भारतीय उपद्वीप के ऊपर उतना ही मजबूत कम दबाव का क्षेत्र (लो प्रेशर सिस्टम) बनता है। यही कम दबाव आगे चलकर मानसूनी हवाओं को समंदर से भारत की मुख्य भूमि की तरफ खींचने में मुख्य भूमिका निभाता है। इसलिए ऐसा माना जा रहा है कि साल 2026 का यह अनोखा और प्रचंड नौतपा भले ही कुछ दिनों के लिए जनजीवन को बेहाल करे, लेकिन भविष्य में एक बेहतरीन मानसून और अच्छी खेती की मजबूत नींव भी रखने जा रहा है।
