फ़टाफट डेस्क। स्वच्छ भारत का सपना अक्सर सार्वजनिक दीवारों पर फैली गंदगी के दागों के नीचे दबा नजर आता है, लेकिन कर्नाटक के मैसूर ने इस समस्या का एक ऐसा ‘जीनियस’ समाधान खोज निकाला है, जिसने सोशल मीडिया पर बहस छेड़ दी है। शहर की उन दीवारों पर, जो कभी गंदगी का ठिकाना हुआ करती थीं, अब प्रशासन ने बड़े-बड़े शीशे (mirrors) लगा दिए हैं। यह आइडिया सुनने में जितना सरल है, मनोवैज्ञानिक रूप से उतना ही गहरा प्रहार करता है; क्योंकि अब अगर कोई व्यक्ति खुले में पेशाब करने के इरादे से दीवार की ओर बढ़ेगा, तो उसे किसी कानून का डर नहीं, बल्कि शीशे में अपना ही चेहरा देखकर शर्मिंदगी का सामना करना होगा।
इस अनोखे प्रयोग का वीडियो ‘Akki Rotti’ (@Theshashank_p) नामक एक्स यूजर ने साझा किया है, जिसे अब तक 5 लाख से अधिक बार देखा जा चुका है। वीडियो शेयर करते हुए यूजर ने चुटकी लेते हुए लिखा कि इस आइडिया को देने वाला व्यक्ति नोबेल पुरस्कार का हकदार है। दरअसल, यह प्रयोग ‘सेल्फ-रिफ्लेक्शन’ के सिद्धांत पर काम करता है, जहाँ इंसान खुद को गलत काम करते हुए देखते ही झेंप जाता है और कदम पीछे खींच लेता है। जहाँ एक ओर लोग इस रचनात्मक कदम की तारीफ कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर यह भारत में ‘सिविक सेंस’ की भारी कमी पर एक कड़वा तंज भी है।
यह विडंबना ही है कि शिक्षित वयस्कों को बुनियादी स्वच्छता सिखाने के लिए प्रशासन को इस हद तक जाकर मनोवैज्ञानिक घेराबंदी करनी पड़ रही है। वायरल होते इस वीडियो पर हजारों प्रतिक्रियाएं आ रही हैं, जिनमें से अधिकांश का मानना है कि मानसिकता बदलने के लिए सिर्फ कड़े कानून नहीं, बल्कि ऐसे ही ‘क्रिएटिव झटके’ जरूरी हैं।
