शिवरीनारायण, छत्तीसगढ़। माता शबरी की ऐतिहासिक और आध्यात्मिक नगरी शिवरीनारायण में सांस्कृतिक पुनर्जागरण का एक नया अध्याय लिखा गया, जहाँ ‘राम मिलेंगे आश्रम’ (तेंदुआ धाम) में आयोजित ‘शबरी की निष्ठा’ कथा के दौरान 50 परिवारों ने अपनी जड़ों की ओर लौटते हुए सनातन धर्म को अपनाया। परम पूज्य जगद्गुरु रामभद्राचार्य महाराज के पावन सानिध्य में आयोजित इस कार्यक्रम में मंत्रोच्चारण और पारंपरिक विधि-विधान के साथ इन परिवारों का सनातन मूल्यों में स्वागत किया गया।
राम मिलेंगे आश्रम आयोजन समिति, धर्म जागरण समन्वय विभाग, दिलीप सिंह जूदेव फाउंडेशन और सेवा न्याय उत्थान फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस समारोह का सबसे भावुक क्षण वह था, जब अखिल भारतीय घरवापसी प्रमुख प्रबल प्रताप सिंह जूदेव ने स्वयं धर्मांतरित परिवारों के चरण पखारकर उन्हें मुख्यधारा में शामिल किया।
यह आयोजन उसी पवित्र भूमि पर संपन्न हुआ, जहाँ पौराणिक मान्यताओं के अनुसार माता शबरी ने प्रभु श्री राम को प्रेमवश जूठे बेर अर्पित किए थे। इस ऐतिहासिक संदर्भ ने कार्यक्रम की गरिमा और भावनात्मक गहराई को और बढ़ा दिया। इस अवसर पर कार्यक्रम संयोजक डॉ. अशोक चतुर्वेदी, सर्वेश्वर दास महाराज, धर्म जागरण के राजकुमार चंद्रा और अंजू ग़बेल सहित कई संत व समाजसेवी उपस्थित रहे।
आयोजकों ने इस पहल को सामाजिक समरसता और आत्मगौरव की दिशा में एक बड़ा कदम बताया, जिसका उद्देश्य आने वाली पीढ़ियों को अपनी सांस्कृतिक चेतना से जोड़ना है। कार्यक्रम का समापन ‘जय श्री राम’ के गगनभेदी उद्घोष के साथ हुआ, जो क्षेत्र में सांस्कृतिक एकता का प्रतीक बन गया।
