अम्बिकापुर..(सीतापुर/अनिल उपाध्याय)..छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में अंतर्राज्यीय लकड़ी तस्करों ने आतंक का पर्याय रच दिया है। सीतापुर क्षेत्र के गांवों में अब कानून का नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश से आए तस्करों और उनके स्थानीय गुर्गों का खौफ बोल रहा है। ये तस्कर न केवल सरकारी नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं, बल्कि ग्रामीणों की निजी भूमि पर लगे दशकों पुराने पेड़ों को भी डंके की चोट पर काट रहे हैं।
आलम यह है कि जो ग्रामीण अपनी संपत्ति बचाने की कोशिश करता है, उसे जान से मारने की धमकी दी जाती है या सरेआम मारपीट कर उसका मनोबल तोड़ दिया जाता है। प्रशासन की सुस्ती ने इन अपराधियों के हौसले इतने बुलंद कर दिए हैं कि अब उन्हें न तो पुलिस का डर है और न ही कानून का। भोले-भाले ग्रामीणों के लिए उनकी जमीन ही अब असुरक्षित हो गई है, क्योंकि तस्करों का नेटवर्क गांव-गांव में सक्रिय है जो पहले पेड़ों को औने-पौने दामों में खरीदने का झांसा देते हैं और इनकार करने पर गुंडागर्दी पर उतर आते हैं।
तस्करों की इस हिमाकत का ताजा शिकार ग्राम रायकेरा केनापारा निवासी मेघनाथ राम हुए हैं। रायकेरा के करुमहुआ में मेघनाथ की पुश्तैनी जमीन पर सेमल का एक विशाल पेड़ दशकों से खड़ा था, जिसे उन्होंने अपने घरेलू उपयोग के लिए सहेज कर रखा था। लेकिन सप्ताह भर पहले, तस्करों ने बिना किसी अनुमति और बिना भूस्वामी को सूचना दिए, आतंक के दम पर उस पेड़ को कटवा दिया। जब मेघनाथ ने अपनी ही जमीन पर हो रही इस लूट का विरोध किया, तो तस्करों ने पहले उन्हें पैसों का लालच देकर चुप कराने की कोशिश की, और नाकाम रहने पर उन्हें “उठा लेने” और जान से मारने की धमकी दी।
तस्करों की इस गुंडागर्दी के खिलाफ मेघनाथ ने घुटने टेकने के बजाय न्याय की राह चुनी है और एसडीएम को ज्ञापन सौंपकर इस अवैध कटाई पर रोक लगाने के साथ-साथ दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है। क्षेत्र में बढ़ता यह जनाक्रोश किसी भी दिन एक बड़े टकराव का रूप ले सकता है, क्योंकि ग्रामीण अब खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। इस गंभीर मामले पर एसडीएम फागेश सिन्हा का कहना है कि सूचना प्राप्त होते ही उचित और कड़ी कार्यवाही की जाएगी, लेकिन सवाल यह उठता है कि आखिर कब तक ये अंतर्राज्यीय गिरोह सरगुजा की हरियाली और शांति को लूटते रहेंगे?
