रायपुर। छत्तीसगढ़ के औद्योगिक परिदृश्य को सुरक्षित और सुदृढ़ बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए ‘छत्तीसगढ़ राज्य औद्योगिक सुरक्षा बल (एसआईएसएफ) नियम, 2026’ को आधिकारिक मंजूरी दे दी है। 5 मई को राजपत्र में अधिसूचित होने के साथ ही ये नियम तत्काल प्रभाव से लागू हो गए हैं, जिससे राज्य में केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) की तर्ज पर एक समर्पित सुरक्षा तंत्र के गठन का मार्ग प्रशस्त हो गया है। गृह (पुलिस) विभाग द्वारा तैयार किए गए ये नियम छत्तीसगढ़ राज्य औद्योगिक सुरक्षा बल अधिनियम, 2025 के अंतर्गत क्रियान्वित किए गए हैं, जिन्हें श्रम प्रशासन और औद्योगिक सुरक्षा के क्षेत्र में अब तक का सबसे बड़ा सुधार माना जा रहा है। इस नई व्यवस्था का मुख्य ध्येय कार्य समितियों, ट्रेड यूनियनों और शिकायत निवारण प्रणालियों के बीच एक पारदर्शी और संतुलित तालमेल स्थापित करना है, ताकि राज्य का औद्योगिक वातावरण और अधिक निवेश-अनुकूल बन सके।
संरचनात्मक दृष्टि से इस विशेष बल को दो श्रेणियों कार्यपालक और अनुसचिवीय में विभाजित किया गया है, जिसकी कमान सीधे पुलिस महानिदेशक (DGP) के हाथों में होगी। प्रशासन और कड़े अनुशासन को बनाए रखने के लिए विशेष डीजीपी से लेकर डीआईजी स्तर के अनुभवी अधिकारी इस बल का नेतृत्व करेंगे, जबकि बटालियन स्तर पर कमान सेनानी (कमांडेंट) के पास होगी। बल की सबसे बड़ी विशेषता इसकी प्रतिनियुक्ति प्रणाली है, जिसमें राज्य पुलिस और सशस्त्र बलों के जांबाज अधिकारियों व कर्मचारियों को 5 वर्ष की अवधि के लिए तैनात किया जाएगा, जिसे विशेष परिस्थितियों में 6 वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है। इस कठिन और विशेष कर्तव्य के प्रोत्साहन स्वरूप तैनात कर्मियों को उनके मूल वेतन पर 12 प्रतिशत अतिरिक्त भत्ता भी देय होगा। आयु सीमा के मापदंडों को देखें तो आरक्षकों के लिए अधिकतम 40 वर्ष, प्रधान आरक्षकों के लिए 45 वर्ष और निरीक्षकों के लिए 52 वर्ष निर्धारित की गई है।
यह बल न केवल सरकारी उपक्रमों बल्कि निजी और संयुक्त क्षेत्र के औद्योगिक संस्थानों को भी ‘सशुल्क’ पेशेवर सुरक्षा कवच प्रदान करेगा। सुरक्षा के दायरे को केवल पहरेदारी तक सीमित न रखते हुए, सीजी-एसआईएसएफ सुरक्षा ऑडिट, आपदा प्रबंधन योजना और अग्नि सुरक्षा परामर्श जैसी उच्च-स्तरीय विशेषज्ञ सेवाएं भी मुहैया कराएगा। किसी भी संस्थान में बल की तैनाती से पूर्व एक ‘संयुक्त सर्वेक्षण बोर्ड’ का गठन किया जाएगा, जो सूक्ष्मता से जोखिमों का आकलन कर आवश्यक सुरक्षा बल की संख्या तय करेगा। सुरक्षा को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए इस बल को गिरफ्तारी और तलाशी के विशेष वैधानिक अधिकार भी प्रदान किए गए हैं, जिसके लिए उन्हें भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की कानूनी प्रक्रियाओं का कड़ाई से पालन करना होगा। यह सुधार छत्तीसगढ़ को एक सुरक्षित और संगठित औद्योगिक शक्ति के रूप में स्थापित करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।
