फटाफट डेस्क। बेरूत से आ रही खबरें लेबनान की भयावह स्थिति को बयां कर रही हैं, जहाँ 16 अप्रैल से लागू सीजफायर के दावों के बीच इजरायल ने अपने सैन्य अभियानों को और अधिक आक्रामक कर दिया है। पिछले महज 24 घंटों के भीतर इजरायली लड़ाकू विमानों ने दक्षिणी लेबनान पर 50 से अधिक बार बमबारी की है, जिसमें अब तक 41 लोगों के मारे जाने की पुष्टि हुई है। अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, शनिवार शाम से शुरू हुआ यह तांडव रविवार सुबह तक जारी रहा, जिससे पूरा इलाका दहल उठा है। चिहीन और अर-रयहान जैसे शहरों में हुए जबरदस्त धमाकों ने भारी तबाही मचाई है, जिसके बाद बेबस नागरिक अपने मासूम बच्चों के साथ सुरक्षित ठिकानों की ओर पलायन करने को मजबूर हैं। लेबनान में अब तक मरने वालों का कुल आंकड़ा 2,000 को पार कर चुका है, जबकि आसमान में चौबीसों घंटे मंडरा रहे इजरायली ड्रोन स्थानीय लोगों के मन में खौफ पैदा कर रहे हैं।
यह रक्तरंजित संघर्ष कोई नया नहीं है, बल्कि इसकी जड़ें 1948 में इजरायल के गठन के विरोध से जुड़ी हैं। दशकों से चले आ रहे इस विवाद ने 1970 के दशक में तब तूल पकड़ा जब फिलिस्तीन मुक्ति संगठन (PLO) ने दक्षिणी लेबनान को अपना ठिकाना बनाया। इसके जवाब में इजरायल ने 1978 में ‘ऑपरेशन लिटानी’ के जरिए लेबनान की धरती पर कदम रखा। 1982 के युद्ध के दौरान जब इजरायली सेना बेरूत तक जा पहुंची, तब ईरान समर्थित संगठन हिजबुल्लाह का उदय हुआ, जो आज इजरायल के लिए सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है। साल 2000 में इजरायल की वापसी और 2006 में हुए 34 दिनों के भीषण युद्ध के बाद भी शेबा फार्म्स जैसे विवादित इलाकों ने शांति की राह में हमेशा रोड़ा अटकाया।
अक्टूबर 2023 में हमास के समर्थन में हिजबुल्लाह द्वारा उत्तरी इजरायल पर किए गए रॉकेट हमलों ने इस आग को फिर से भड़का दिया। इसके बाद इजरायल ने न केवल हवाई हमले तेज किए, बल्कि सीमित जमीनी कार्रवाई के जरिए हिजबुल्लाह के बुनियादी ढांचे को निशाना बनाना शुरू किया। साल 2024 के अंत तक यह संघर्ष अपने चरम पर पहुंच गया। हालांकि, अप्रैल में अमेरिकी मध्यस्थता से एक संक्षिप्त युद्धविराम की कोशिश की गई, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। इजरायल का स्पष्ट मानना है कि हिजबुल्लाह की मौजूदगी उसके अस्तित्व के लिए खतरा है, और जब तक वह उसे पूरी तरह निशस्त्र नहीं कर देता, दक्षिणी लेबनान की धरती इन धमाकों से गूंजती रहेगी।
