फटाफट डेस्क। वाशिंगटन और तेहरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के बीच ईरान ने अमेरिका को एक नया 14 सूत्रीय शांति प्रस्ताव भेजा है, जिसे लेकर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बेहद सख्त और अनिश्चित रुख अपनाया है। फ्लोरिडा के पाम बीच इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर पत्रकारों से मुखातिब होते हुए ट्रंप ने पुष्टि की कि उन्हें तेहरान का प्रस्ताव प्राप्त हो गया है, लेकिन साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट कर दिया कि उन्हें फिलहाल ईरान के साथ किसी ठोस समझौते की संभावना नजर नहीं आती। ट्रंप ने ‘ट्रुथ सोशल’ पर अपनी भावनाएं व्यक्त करते हुए कहा कि ईरान ने बीते 47 वर्षों में विश्व मानवता को जो क्षति पहुँचाई है, उसकी कीमत उसने अभी पूरी नहीं चुकाई है। राष्ट्रपति ने तंज कसते हुए कहा कि ईरान आर्थिक और ढांचागत रूप से तबाह हो चुका है और वह समझौते के लिए छटपटा रहा है, लेकिन अगर अमेरिका पीछे हट भी जाए, तो इस मुल्क को दोबारा खड़े होने में दशकों लग जाएंगे।
ईरान के इस नए प्रस्ताव में मुख्य रूप से गैर-आक्रामकता की गारंटी, आर्थिक नाकाबंदी हटाने और लेबनान समेत विभिन्न मोर्चों पर जारी युद्ध को समाप्त करने की मांगें शामिल हैं। हालांकि, ट्रंप ने नेतृत्व के संकट पर सवाल उठाते हुए कहा कि ईरान में यह तय करना मुश्किल है कि असल सत्ता किसके हाथ में है। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यदि ईरान ने कोई भी ‘बेजा हरकत’ की, तो अमेरिका पुनः सैन्य हमले शुरू करने से पीछे नहीं हटेगा। ट्रंप की इस टिप्पणी के तुरंत बाद ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने भी पलटवार करते हुए युद्ध के लिए अपनी पूर्ण तैयारी का ऐलान कर दिया है।
इस कूटनीतिक रस्साकशी के बीच, खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते संकट को देखते हुए कतर ने मध्यस्थता के प्रयास तेज कर दिए हैं। कतर के प्रधानमंत्री मोहम्मद बिन अब्दुल रहमान बिन जसीम अल-थानी ने ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची से संपर्क कर उन्हें सूझबूझ और अंतरराष्ट्रीय कानूनों के दायरे में रहकर काम करने की सलाह दी है। कतर का यह हस्तक्षेप ऐसे समय में आया है जब इजराइल और अमेरिका के हालिया हमलों के जवाब में कतर के गैस प्लांट और हमाद एयरपोर्ट जैसे रणनीतिक ठिकानों पर खतरे मंडरा रहे हैं। दूसरी ओर, व्हाइट हाउस ने अपनी राजनयिक टीम को और मजबूत करते हुए अनुभवी विशेषज्ञ निक स्टीवर्ट को स्टीव विटकॉफ की टीम में शामिल किया है, जो युद्ध समाप्ति की संभावनाओं पर काम करेंगे। फिलहाल, पूरी दुनिया की नजरें एयरफोर्स वन में ट्रंप द्वारा की जाने वाली इस 14 सूत्रीय प्रस्ताव की विस्तृत समीक्षा पर टिकी हैं।
