कोरबा। जिले के कटघोरा वनमंडल का जटगा रेंज एक बार फिर गजराज के कोप से थर्रा उठा है। शुक्रवार और शनिवार की दरमियानी रात चार विशालकाय हाथियों के एक दल ने पटेल पारा और धोबघट गांवों को अपना निशाना बनाते हुए भारी तबाही मचाई। रात के सन्नाटे को चीरती हाथियों की चिंघाड़ और टूटते घरों की आवाज ने ग्रामीणों की नींद उड़ा दी, जिसके बाद अपनी जान बचाने के लिए लोग रात भर मशालें लेकर खेतों और छतों पर डटे रहे।
वन विभाग के अनुसार, यह उत्पात रात करीब 12 बजे शुरू हुआ जब हाथियों ने सबसे पहले पटेल पारा में किसान रामलाल के घर की दीवारें ढहा दीं और भीतर रखी 15 बोरी धान को कुचलकर बर्बाद कर दिया। हाथियों का यह दल यहीं नहीं रुका, बल्कि इसके बाद धोबघट गांव में घुसकर दो अन्य परिवारों के आशियानों को भी मलबे में तब्दील कर दिया। गांव की रहने वाली निर्मला यादव की आंखों में अब भी वह खौफ साफ दिखता है। उन्होंने अपनी आपबीती सुनाते हुए बताया कि हाथियों ने न केवल उनके घर को नुकसान पहुंचाया, बल्कि उनकी बाड़ी में कड़ी मेहनत से उगाई गई पपीता, गन्ना, केला और सब्जियों की फसलों को पूरी तरह तहस-नहस कर दिया।
स्थिति इतनी विकराल थी कि ग्रामीणों को मजबूरन अपने घरों को खाली कर सुरक्षित स्थानों की ओर भागना पड़ा। स्थानीय लोगों का कहना है कि करीब 40 हाथियों का एक बड़ा कुनबा पिछले कई महीनों से इस इलाके में डेरा डाले हुए है, जो दिन में घने जंगलों में छिपा रहता है और सूरज ढलते ही भोजन की तलाश में बस्तियों का रुख कर लेता है। लगातार हो रहे इन हमलों से किसानों की जमा-पूंजी और साल भर की मेहनत मिट्टी में मिल रही है।
इधर, घटना की तस्दीक होते ही वन विभाग की टीम ने प्रभावित गांवों का दौरा कर नुकसान का जायजा लिया है। कटघोरा वनमंडल के डीएफओ कुमार निशांत ने बताया कि हाथियों की हर हलचल पर पैनी नजर रखी जा रही है और ग्रामीणों को जंगल की ओर न जाने की सख्त हिदायत दी गई है। वन विभाग ने गांवों में मुनादी (ढोल बजाकर घोषणा) करवाकर लोगों को अलर्ट रहने को कहा है। साथ ही, पीड़ित परिवारों को राहत पहुँचाने के लिए शासन के नियमों के तहत मुआवजे की कागजी कार्रवाई भी शुरू कर दी गई है। हालांकि, प्रशासन की इन कोशिशों के बावजूद ग्रामीणों के मन में बैठा हाथियों का डर कम होने का नाम नहीं ले रहा है, क्योंकि हाथियों का यह दल अब भी रिहायशी इलाकों के पास ही डटा हुआ है।
