-घर में घुसकर गोलियां—एक की मौत, दूसरा मौत से जंग लड़ रहा
@संजय यादव
जांजगीर-चांपा। अब अपराधियों के कब्जे में जाता दिख रहा है जिला। रेत माफियाओं का आतंक इस हद तक बढ़ गया है कि अब वे घर में घुसकर गोलियां बरसा रहे हैं। अवैध रेत कारोबार की प्रतिस्पर्धा ने जिले को खूनी रणभूमि में बदल दिया है। यूपी और बिहार से आए रेत माफियाओं की घुसपैठ, वर्चस्व की लड़ाई और करोड़ों के खेल ने कानून-व्यवस्था को खुलेआम चुनौती दे दी है।
ताज़ा मामला बिर्रा थाना क्षेत्र के करही गांव का है, जहां बेखौफ नकाबपोश बदमाशों ने घर में घुसकर दो युवकों पर गोलियां चला दीं। एक युवक की मौके पर मौत हो गई, जबकि दूसरा अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच झूल रहा है। सवाल साफ है—क्या यह सिर्फ हत्या है या अवैध रेत कारोबार की खूनी कीमत?
जिले की जीवनरेखाएं कही जाने वाली नदियां—हसदेव नदी और महानदी—आज रेत माफियाओं के कब्जे में हैं। सैकड़ों ट्रैक्टर और हाइवा रोज़ाना अवैध रेत ढो रहे हैं। रेत सिर्फ जिले तक सीमित नहीं, बल्कि दूसरे जिलों और राज्यों तक पहुंचाई जा रही है। सबको दिख रहा है, मगर रोकने वाला कोई नहीं।
सबसे गंभीर सवाल खनिज विभाग और जिला प्रशासन पर है। आरोप है कि अवैध उत्खनन पर कार्रवाई करने के बजाय संरक्षण दिया जा रहा है। इस काले धंधे में कुछ नेताओं की भूमिका की भी चर्चा आम है, लेकिन जांच और कार्रवाई नदारद है। क्या प्रशासन की चुप्पी माफियाओं का सबसे बड़ा हथियार बन चुकी है?
जिला प्रशासन से सवाल बहुत है,जिसका जवाब देना होगा…
-क्या जांजगीर-चांपा को रेत माफियाओं का सुरक्षित ठिकाना बना दिया गया है?
-अवैध रेत उत्खनन के पीछे किसका संरक्षण है?
इस हत्या की नैतिक और प्रशासनिक जिम्मेदारी कौन लेगा
-एक युवक की जान चली गई, दूसरा मौत से लड़ रहा है…
अब भी अगर प्रशासन नहीं जागा, तो इसका जिम्मेदार कौन।
