रायपुर। विश्व धरोहर दिवस के अवसर पर रायपुर का महंत घासीदास स्मारक संग्रहालय इतिहास और भविष्य के संगम का गवाह बना। शनिवार को आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में न केवल छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित किया गया, बल्कि बदलते दौर में इसे आपदाओं से बचाने के लिए विशेषज्ञों ने नए मंत्र भी दिए। संस्कृति विभाग और पुरातत्त्व, अभिलेखागार एवं संग्रहालय संचालनालय द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम ने कला, इतिहास और आपदा प्रबंधन का अनूठा मेल प्रस्तुत किया।
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण कला वीथिका में सजी विशेष चित्र प्रदर्शनी रही। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रेरणादायक पहल “सोमनाथ स्वाभिमान पर्व- अटूट आस्था के 1000 वर्ष” से प्रेरित होकर, यहाँ सोमनाथ मंदिर के 19वीं, 20वीं और 21वीं सदी के सफर को चित्रों के माध्यम से जीवंत किया गया। मंदिर के स्थापत्य में आए परिवर्तनों और इसके सांस्कृतिक महत्व को देख दर्शक अभिभूत नजर आए। वहीं, छत्तीसगढ़ के प्रमुख शिव मंदिरों- जैसे दंतेवाड़ा का दंतेश्वरी मंदिर, रतनपुर का महामाया मंदिर, राजिम का राजीवलोचन मंदिर, सहसपुर और खरौद के मंदिरों- की वास्तुकला को दर्शाते चित्रों ने स्थानीय धरोहरों के गौरव को राष्ट्रीय पटल पर स्थापित करने का काम किया।
प्रदर्शनी के साथ ही इस वर्ष की विश्व धरोहर दिवस थीम “इमरजेंसी रिस्पॉन्स फॉर लिविंग हेरिटेज इन कॉन्टेक्स्ट ऑफ कॉन्फ्लिक्ट एंड डिजास्टर्स” पर एक विचारोत्तेजक व्याख्यान सत्र भी आयोजित किया गया। इसमें नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिजास्टर मैनेजमेंट के विशेषज्ञ डॉ. संतोष कुमार, आईआईटी रुड़की के प्रोफेसर डॉ. राम सतीश पुसुपुलेटी और एनडीआरएफ के डिप्टी कमांडेंट पवन जोशी ने धरोहरों के संरक्षण पर गंभीर मंथन किया। विशेषज्ञों ने एक स्वर में कहा कि मूर्त और अमूर्त सांस्कृतिक धरोहरें आज विभिन्न खतरों से जूझ रही हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल सरकारी प्रयासों से इनका संरक्षण संभव नहीं है, बल्कि स्थानीय समुदायों का जुड़ाव और सक्रिय भागीदारी ही इन्हें भविष्य के लिए बचा सकती है।
संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में इतिहासकार, शोधकर्ता, विद्यार्थी और जागरूक नागरिक शामिल हुए। कार्यक्रम के दौरान प्रदेश के प्रमुख मंदिरों के ट्रस्ट और समितियों के पदाधिकारियों की उपस्थिति ने यह सिद्ध किया कि समाज अपनी विरासत को लेकर कितना संवेदनशील है। पुरातत्ववेत्ता प्रभात कुमार सिंह के प्रभावी संचालन में संपन्न इस कार्यक्रम में इंटैक रायपुर चैप्टर के प्रतिनिधियों सहित विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों की सक्रिय भूमिका रही, जिन्होंने रायपुर में विश्व धरोहर दिवस को एक यादगार आयोजन बना दिया।
