बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में बर्ड फ्लू के प्रकोप ने अब आर्थिक संकट का रूप ले लिया है। संक्रमण रोकने के लिए लगाए गए कड़े प्रतिबंधों के खिलाफ चिकन और अंडा कारोबारियों का गुस्सा शनिवार को फूट पड़ा, जब सैकड़ों व्यापारी सड़क पर उतर आए और अमर अग्रवाल के निवास का घेराव कर राहत की मांग की।
दरअसल, कोनी स्थित शासकीय कुक्कुट प्रक्षेत्र में बर्ड फ्लू की पुष्टि के बाद जिला प्रशासन ने एहतियातन शहर समेत 10 किलोमीटर के दायरे में चिकन और अंडों की बिक्री पर पूरी तरह रोक लगा दी है। संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए नगर निगम, पशुपालन और खाद्य विभाग की संयुक्त टीमें लगातार दुकानों और होटलों में जांच कर रही हैं, जिससे कारोबार पूरी तरह ठप हो गया है।
इस सख्ती का सीधा असर शहर के करीब 200 से ज्यादा दुकानदारों पर पड़ा है। व्यापारियों का कहना है कि रोजाना एक करोड़ रुपए से अधिक का कारोबार प्रभावित हो रहा है, जिससे उनके सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। पहले ही नवरात्रि के दौरान बिक्री ठप रहने से नुकसान झेल चुके व्यापारी अब लगातार बंदी से और परेशान हो गए हैं।
प्रदर्शन के दौरान कारोबारियों ने विधायक से मुलाकात कर मांग रखी कि सुरक्षा मानकों के साथ आंशिक छूट दी जाए, ताकि नियंत्रित तरीके से व्यापार फिर शुरू हो सके। उनका तर्क है कि संक्रमण केवल सरकारी हेचरी तक सीमित है, जबकि निजी पोल्ट्री और दुकानों में ऐसी कोई समस्या सामने नहीं आई है। इसके बावजूद सभी पर एक समान प्रतिबंध लगाना उनके साथ अन्याय है।
व्यापारियों ने यह भी कहा कि वे मुख्य रूप से बॉयलर मुर्गों का व्यापार करते हैं, जिनमें संक्रमण की संभावना कम होती है, लेकिन प्रशासन ने इस पहलू को नजरअंदाज कर दिया है। लगातार बंदी के कारण न सिर्फ छोटे दुकानदार, बल्कि होटल और रेस्टोरेंट व्यवसाय भी बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। शहर के कई नॉनवेज रेस्टोरेंट्स बंद हो चुके हैं, जबकि अन्य जगहों पर चिकन और अंडे से जुड़े व्यंजन बंद कर दिए गए हैं।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए विधायक अमर अग्रवाल ने प्रदर्शनकारियों को भरोसा दिलाया है कि वे कलेक्टर से चर्चा कर समाधान निकालने की कोशिश करेंगे। फिलहाल प्रशासन संक्रमण को नियंत्रित करने के लिए सख्ती बरत रहा है, वहीं व्यापारी राहत और आंशिक छूट की उम्मीद में नजरें टिकाए हुए हैं।
