गरियाबंद. छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में शासकीय योजनाओं के क्रियान्वयन में लगातार हो रही लेटलतीफी अब पंचायत सचिवों पर भारी पड़ गई है. जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) प्रखर चंद्राकर ने सख्त कदम उठाते हुए जनपद पंचायत मैनपुर के 57 तथा जनपद पंचायत देवभोग के 43 ग्राम पंचायत सचिवों का जनवरी माह का वेतन रोकने की कार्रवाई की है. इस निर्णय से जिलेभर के पंचायत अमले में हड़कंप मच गया है.
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जानकारी के अनुसार, जिले की ग्राम पंचायतों में प्रधानमंत्री आवास योजना, समर्थ पोर्टल, ग्राम संपदा, 15वां वित्त आयोग सहित अन्य विकास योजनाओं के कार्यों की नियमित समीक्षा की जा रही थी. निरीक्षण के दौरान यह सामने आया कि कई पंचायतों में निर्माण एवं विकास कार्यों की गति बेहद धीमी है, वहीं योजनाओं की प्रगति भी अपेक्षा के अनुरूप नहीं पाई गई.
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CEO प्रखर चंद्राकर द्वारा पहले भी समीक्षा बैठकें आयोजित कर पंचायत सचिवों को निर्माण कार्यों में तेजी लाने, समय-सीमा के भीतर गुणवत्तापूर्ण कार्य पूर्ण कराने और योजनाओं को प्रभावी रूप से लागू करने के निर्देश दिए गए थे. बावजूद इसके, बार-बार चेतावनी और निर्देशों के बाद भी कार्यों में सुधार नहीं हुआ.
इस लापरवाही को गंभीरता से लेते हुए जिला पंचायत प्रशासन ने कड़ा निर्णय लेते हुए संबंधित सचिवों का वेतन रोक दिया. CEO ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में किसी भी प्रकार की उदासीनता बर्दाश्त नहीं की जाएगी और समयबद्ध व गुणवत्तापूर्ण कार्य ही प्राथमिकता होगी.
