नई दिल्ली। बजट का दिन आते ही देश की निगाहें आंकड़ों, घोषणाओं और नीतिगत फैसलों पर टिक जाती हैं, लेकिन हर साल की तरह इस बार भी संसद भवन में एक अलग ही चर्चा शुरू हो गई। वजह बनीं वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और उनकी साड़ी। बजट भाषण से पहले जैसे ही वह सदन में पहुंचीं, उनकी पारंपरिक कांजीवरम साड़ी ने सबका ध्यान अपनी ओर खींच लिया। यह महज पहनावा नहीं था, बल्कि इसके पीछे संस्कृति, राजनीति और संदेश.. तीनों की झलक साफ दिखाई दी।
निर्मला सीतारमण जिस साड़ी में नजर आईं, वह तमिलनाडु के कांचीपुरम की विश्वप्रसिद्ध कांजीवरम सिल्क थी। गहरे पर्पल रंग की इस ‘कट्टम कांजीवरम’ साड़ी पर हल्के सुनहरे-भूरे रंग की चेक डिजाइन थी, जिसे तमिल में कट्टम कहा जाता है। कॉफी ब्राउन बॉर्डर और उस पर किया गया बारीक थ्रेड वर्क साड़ी को बेहद सादगीपूर्ण लेकिन प्रभावशाली बना रहा था। यह साड़ी न सिर्फ दक्षिण भारतीय परंपरा की पहचान है, बल्कि सदियों पुरानी हथकरघा कला और कारीगरों की मेहनत का भी प्रतीक मानी जाती है।
बजट के दिन निर्मला सीतारमण की साड़ी को लेकर चर्चा नई नहीं है। हर साल वह किसी न किसी राज्य की पारंपरिक साड़ी पहनकर संसद पहुंचती हैं और इस तरह भारतीय हैंडलूम को राष्ट्रीय मंच पर जगह देती हैं। उनकी साड़ी जैसे बिना शब्दों के यह कह देती है कि भारत की विविधता, उसकी संस्कृति और कारीगरी भी उतनी ही अहम है जितनी आर्थिक नीतियां। इस बार तमिलनाडु की कांजीवरम साड़ी पहनना इसलिए भी खास माना जा रहा है, क्योंकि राज्य में इसी साल विधानसभा चुनाव होने हैं।
साड़ी के इस सांस्कृतिक संकेत के साथ बजट में तमिलनाडु को कई बड़ी सौगातें भी मिलीं। बेंगलुरु-चेन्नई और हैदराबाद-चेन्नई हाई स्पीड रेल कॉरिडोर की घोषणा से राज्य की कनेक्टिविटी और औद्योगिक विकास को नई रफ्तार मिलने की उम्मीद है। इसके अलावा रेयर अर्थ कॉरिडोर के जरिए माइनिंग, प्रोसेसिंग, रिसर्च और मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने का रोडमैप भी पेश किया गया।
किसानों के लिहाज से भी बजट तमिलनाडु के लिए खास रहा। कोकोनट प्रोमोशन स्कीम के तहत 80 लाख किसानों को लाभ मिलने की बात कही गई है। तमिलनाडु में करीब 4.93 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में नारियल की खेती होती है, ऐसे में यह योजना सीधे तौर पर राज्य के किसानों की आमदनी बढ़ाने में मददगार साबित हो सकती है। इसके साथ ही काजू और कोको सेक्टर को बढ़ावा देने की घोषणा ने भी किसानों के बीच उम्मीद जगाई है।
कुल मिलाकर इस बजट में आंकड़ों के साथ-साथ प्रतीकों की भी अपनी भूमिका रही। निर्मला सीतारमण की कांजीवरम साड़ी ने जहां तमिलनाडु की संस्कृति को सम्मान दिया, वहीं बजट की घोषणाओं ने यह संदेश भी दिया कि सरकार की नजर राज्य के विकास और किसानों की आय पर टिकी है। शायद यही वजह है कि इस बार बजट की चर्चा सिर्फ भाषण तक सीमित नहीं रही, बल्कि साड़ी से लेकर सौगातों तक हर पहलू सुर्खियों में रहा।
