अम्बिकापुर..(सीतापुर/अनिल उपाध्याय)..सरगुजा जिले के सीतापुर क्षेत्र में बिना अनुमति इमरती लकड़ी की अवैध कटाई और तस्करी का खेल खुलेआम चल रहा है. इलाके में सक्रिय अंतर्राज्यीय लकड़ी तस्करों का गिरोह बेखौफ होकर जंगलों को निशाना बना रहा है और अवैध रूप से काटी गई लकड़ी को पड़ोसी राज्यों में खपा रहा है. बताया जा रहा है कि इन तस्करों को राजनीतिक संरक्षण भी प्राप्त है, जिसके चलते क्षेत्र में लंबे समय से अवैध कटाई और ढुलाई धड़ल्ले से जारी है.
इसी कड़ी में वन विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए तस्करों के मंसूबों पर पानी फेर दिया. मुखबिर से मिली सूचना के आधार पर वन विभाग की टीम ने घेराबंदी कर राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक 43 पर बतौली के पास एक ट्रक को रोका. ट्रक क्रमांक CG15/DC/9203 में भारी मात्रा में अवैध लकड़ी लोड कर उसे पड़ोसी राज्य ले जाया जा रहा था. जांच के दौरान वन विभाग के अधिकारियों ने जब लकड़ी से संबंधित वैध दस्तावेजों की मांग की तो ट्रक चालक कोई भी अनुमति पत्र, कटाई से संबंधित कागजात या टीपी पास प्रस्तुत नहीं कर सका.
दस्तावेजों के अभाव में वन विभाग ने ट्रक सहित अवैध लकड़ी को जब्त कर वन परिक्षेत्र कार्यालय सीतापुर ले आया. जब्त ट्रक की तलाशी लेने पर उसमें नीलगिरी के 35 नग लट्ठे और शीशम के 31 नग लट्ठे पाए गए, जिनकी कीमत लाखों रुपये बताई जा रही है. यह लकड़ी बिना किसी प्रशासनिक अनुमति के काटकर तस्करी के लिए ले जाई जा रही थी.
वन विभाग की इस कार्रवाई से क्षेत्र में सक्रिय लकड़ी तस्करों में हड़कंप मच गया है और कुछ समय के लिए सन्नाटा छा गया है. इस संबंध में वन परिक्षेत्राधिकारी विजय कुमार तिवारी ने बताया कि मामले में भारतीय वन अधिनियम 1927 की धारा 52(1), 33(1), 41 तथा छत्तीसगढ़ वनोपज नियम 2001 की धारा 4 की उपधारा 2(ग) के तहत कार्रवाई की गई है. प्रकरण की विवेचना जारी है और जांच पूरी होने के बाद वन अपराध प्रकरण न्यायालय में प्रस्तुत किया जाएगा.
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